'लोकलुभावन नहीं होगा जेटली का बजट'

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Dec 28, 2017 10:01 PM IST

वित्त वर्ष 2018 में 50,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त उधारी लेने के फैसले से चालू वित्त वर्ष में खर्च को लेकर थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि इससे वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3 प्रतिशत रखने का लक्ष्य हासिल होने की संभावना नहीं है।  इसका मतलब यह है कि 2018-19 में जेटली के पास अतिरिक्त व्यय की संभावना होगी, जो आम चुनाव के पहले का पूर्ण बजट होगा। विशेषज्ञ और विश्लेषकों का कहना है कि केंद्र सराकर ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था के साथ सामाजिक क्षेत्र पर अतिरिक्त खर्च कर सकती है, लेकिन लोकलुभावन बजट होने की संभावना कम है। क्षेत्र विशेष के लिए वित्त की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे नौकरियों के सृजन को बढ़ावा दिया जा सके। 
 
कई बजट का मसौदा तैयार करने में शामिल रहे एक पूर्व सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अगर वित्त मंत्री 3 प्रतिशत के बजाय राजकोषीय घाटा 3.2 प्रतिशत रखने का फैसला करते हैं तो केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए अतिरिक्त आवंटन की व्यवस्था हो सकती है। लेकिन मुझे नहींं लगता कि यह लोक लुभावन बजट होगा।'  अधिकारी ने कहा, 'जरूरी नहीं है कि लोक लुभावन बजट आपको वोट दिला दे। कुछ ऐसी चीजें हैं, जिसे सरकार को निश्चित रूप से समझना चाहिए। अतिरिक्त व्यय कृषि, सिंचाई, ग्रामीण विकास, गरीबी उन्मूलन, ग्रामीण आवास और बुनियादी ढांचा क्षेत्र जैसे राजमार्ग पर होगा। दरअसल ये ही ऐसे क्षेत्र हैं, जहां रोजगार सृजन होगा। जाहिर है कि किसी को कुछ भी मुफ्त नहीं मिलेगा।'
 
वित्त वर्ष 2018-19 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद का 3 प्रतिशत है। राजकोषीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत यह लक्ष्य रखा गया है, जैसा कि  एफआरबीएम रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी। सरकार अभी भी एफआरबीएम समिति की रिपोर्ट पर विचार कर रही है। अगर कोई 11.75 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर की कल्पना करता है, जैसा कि चालू वित्त वर्ष के बजट मेंं रखा गया है, तो अगले साल 2018-19 में जीडीपी 1,87,84,912 करोड़ रुपये होगी। इसके 3 प्रतिशत का मतलब हुआ 5,63,547.36 करोड़ रुपये। अगर 3 प्रतिशत से ऊपर 0.1 प्रतिशत घाटा बढ़ता है तो इसका मतलब हुआ कि 18,784.9 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 
 
बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत करते हुए विश्लेषकों ने कहा कि अगर राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.2 प्रतिशत होता है तो यह अतिरिक्त उधारी के बाद जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अगर कम अवधि के ट्रेजरी बिल को एक साल के ऊपर ले जाया जाता है तो घाटा और बढ़ेगा। विश्लेषक इस बात से सहमत हैं कि अगले साल का राजकोषीय घाटा करीब 3.2 प्रतिशत हो सकता है।  भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक अधिकारी ने कहा, 'अगले साल सामाजिक क्षेत्र, स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य मसलों पर ज्यादा ध्यान होगा। मेरा मानना है कि बजट भाषण जहां लोक लुभावन तरीके से होगा, वहीं वास्तविक बजट काफी विवेकपूर्ण होगा।'  50,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी 2017-18 के 5.8 लाख करोड़ रुपये बजट अनुमान से ऊपर है। वहीं केंद्र ने कम अवधि ट्रेजरी बिल से उधारी 61,203 करोड़ रुपये कम कर दी है। इसकी व जह से राजकोषीय घाटे की सही गणना थोड़ी थकाऊ कवायद हो गई है। 
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