जीएसटी की दिक्कतों से रूबरू कराते आंकड़े

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Jan 17, 2018 09:48 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद नियमों के सरलीकरण पर जोर देने की तैयारी में है जिसमें कर से जुड़ी उपभोक्ताओं की शिकायतें मददगार हो सकती हैं। इन शिकायतों से यह अंदाजा मिलेगा कि आम जनता को नए तंत्र को अपनाने में किस तरह की दिक्कतें आईं और लोग किस तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।  नैशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) के रिकॉर्ड के मुताबिक जुलाई 2017 में कर में बदलाव के शुरुआती कुछ महीने में करीब 11 फीसदी शिकायतें उन उपभोक्ताओं से मिलीं जिनका कहना था कि व्यापारी उनसे जीएसटी ले रहे हैं लेकिन उन्हें सही बिल या जीएसटीएन नंबर मुहैया नहीं कराया जा रहा है। शुरुआती कुछ महीने के दौरान इस तरह के मामले दिखे। कारोबारियों के पक्ष से हेल्पलाइन पर सबसे ज्यादा शिकायतें (करीब 13 फीसदी) जीएसटी के तहत पंजीकरण, रद्द करना, सुधार और रिटर्न दाखिल करने से जुड़ी थीं। हेल्पलाइन पर करीब 58 फीसदी कॉल जीएसटी से जुड़ी सामान्य पूछताछ पर आधारित थीं। अन्य शिकायतें यह थीं कि कारोबारी जीएसटी स्लैब या जीएसटी के नाम पर अधिकतम खुदरा मूल्य से ज्यादा शुल्क वसूल रहे हैं तथा वैट वसूलने के साथ-साथ उत्पाद की डिलीवरी, सेवाओं के रिफंड या उसे बदलने में देरी से जुड़ी शिकायतें भी आम थीं। ऐसी शिकायतें जुलाई और अगस्त में मिलीं। 
 
हालांकि एनसीएच को अनिवार्य तौर पर जीएसटी से जुड़ी शिकायतें या सवाल-जवाब पर काम नहीं करना था लेकिन इसने इनका एक रिकॉर्ड बनाए रखा है। एनसीएच केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय की एक परियोजना है जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय से स्थानांतरित कर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में लाया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इसने मल्टी मीडिया अभियान शुरू किया है ताकि उपभोक्ताओं को कर के बारे में और उन उत्पादों के बारे में जागरूक बनाया जाए जिन पर यह लागू नहीं होता।
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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