सरकार लेगी कम उधार..

अरूप रायचौधरी और ईशान बख्शी | नई दिल्ली Jan 17, 2018 10:08 PM IST

अतिरिक्त उधारी कार्यक्रम की राशि में कमी

केंद्र सरकार ने अपने अतिरिक्त उधारी कार्यक्रम की राशि 500 अरब रुपये से घटाकर 200 अरब रुपये करने की घोषणा की है। इस कटौती से बाजारों और विशेषज्ञों में यह संकेत जाएगा कि सरकार राजकोषीय स्थिति को मजबूत करने के प्रति गंभीर है।  अतिरिक्त उधारी में कटौती के बावजूद देश का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 फीसदी पर पहुंच सकता है। 2017-18 के बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 3.2 फीसदी रखने का लक्ष्य निर्धारित किया  गया था।

सरकारी सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उधारी में कटौती के पीछे मुख्य वजह यह है कि सरकार वित्त वर्ष 2018 में रिजर्व बैंक से अपेक्षा से ज्यादा अधिशेष मिलने की उम्मीद कर रही है। साथ ही प्रत्यक्ष कर में बढ़ोतरी से भी सरकार को मदद मिली है। सरकार द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 15 जनवरी तक प्रत्यक्ष कर में 18.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि बजट अनुमान 15.7 फीसदी का था। प्रत्यक्ष कर संग्रह 6.89 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है जो 9.8 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान का 70.3 फीसदी है। रिफंड मिलाकर सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 8.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। इसका कारण कम रिफंड और नोटबंदी के कारण करदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी हो सकता है।

रिजर्व बैंक ने अपने खातों में आकस्मिक कोष में 131.40 अरब रुपये के हस्तांतरण का प्रावधान किया था। राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए इस राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है।  सरकार ने पिछले साल दिसंबर में बताया था कि वह 2017-18 में बाजार से 500 अरब रुपये की अतिरिक्त उधारी जुटाएगी जिससे बॉन्ड प्रतिफल में तेजी आ गई थी।

बजट में सरकार की शुद्ध उधारी 4.23 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया था। अगर इसमें बॉन्डों की परिपक्वता भी जोड़ दी जाए तो सकल उधारी के 5.8 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान था। सरकार ने यह घोषणा ऐसे वक्त की है कि खासकर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में कमी के कारण राजस्व के उम्मीदों से कम रहने की आशंका जताई जा रही थी। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राजस्व प्राप्तियों और खर्च के रुझान की समीक्षा के बाद यह आकलन किया गया है कि वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की 200 अरब रुपये की अतिरिक्त उधारी पर्याप्त होगी।

सरकार के मुताबिक सरकार ने पिछली तीन नीलामियों में 150 अरब रुपये की उधारी स्वीकार नहीं की। आने वाले दिनों में बाकी 150 अरब रुपये भी अधिसूचित उधारी कार्यक्रम में से कम कर दिए जाएंगे। एक सरकारी सूत्र ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस वर्ष विनिवेश लक्ष्य के बजट अनुमान से ज्यादा रहने की उम्मीद है। प्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर भी स्थिति अच्छी दिख रही है। सार्वजनिक कंपनियों का लाभांश का लक्ष्य भी पूरा हो जाएगा। लेकिन जीएसटी और स्पेक्ट्रम की बिक्री से होने वाली आय के उम्मीद से कम रहने की आशंका है। बजट में इस वित्त वर्ष के दौरान अप्रत्यक्ष कर की वृद्धि 8.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। एकीकृत जीएसटी क्रेडिट के कारण जीएसटी संग्रह के बारे में तस्वीर साफ नहीं है। अलबत्ता हर महीने इसमें कमी आ रही है। सरकार को जीएसटी के कारण कर संग्रह में 250 से 300 अरब रुपये की कमी की आशंका है।

वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक से 430 अरब रुपये का लाभांश मांग रहा है जबकि केंद्रीय बैंक ने 306.5 अरब रुपये लाभांश दे चुका है। रिजर्व बैंक से वित्त मंत्रालय को मिलने वाली कुल राशि उसकी मांग से ज्यादा हो सकती है। इसका कारण यह है कि रिजर्व बैंक ने जो राशि आकस्मिक कोष कोष में डाली है, वह वित्त मंत्रालय की मांग और केंद्रीय बैंक द्वारा भुगतान किए गए लाभांश के बीच अंतर के बराबर है। 

एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि रिजर्व बैंक अपेक्षा से ज्यादा अधिशेष दे सकता है। साथ ही मार्च तक सार्वजनिक कंपनियों का लाभांश लक्ष्य भी पूरा हो चुका होगा। बजट में रिजर्व बैंक, सरकारी बैंकों और सार्वजनिक उपक्रमों से 1.42 लाख करोड़ रुपये का लाभांश मिलने की बात कही गई थी। इनमें से गैर वित्तीय सार्वजनिक उपक्रम 675 अरब रुपये का लाभांश देंगे।
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