पुरानी कार को जीएसटी की रफ्तार

सोहिनी दास | अहमदाबाद Jan 19, 2018 09:41 PM IST

पुरानी कारों का कारोबार करने वाली कंपनियों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने राहत दी है। परिषद ने पुरानी कारों पर कर की दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी और 12 फीसदी करने का फैसला किया है। कंपनियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद उनके मुनाफे में 3 से लेकर 3.5 फीसदी की कमी आई थी लेकिन अब उसमें सुधार होगा। साथ ही पुरानी कारों के बाजार में ग्राहकों को ज्यादा छूट और ऑफर मिलेंगे। जीएसटी परिषद की गुरुवार को हुई 25वीं बैठक में 29 उत्पादों और 54 सेवाओं पर कर की दर में कटौती का फैसला हुआ। इनमें पुरानी कारें भी शामिल हैं। पुरानी बड़ी कारों और एसयूवी पर जीएसटी दर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दी गई जबकि छोटी कारों और मोटर वाहनों को 28 फीसदी से हटाकर 12 फीसदी की श्रेणी में डाल दिया गया। पुरानी कारों की दोनों श्रेणियों पर उपकर को हटा दिया गया है। एम्बुलेंस पर भी 15 फीसदी उपकर समाप्त कर दिया गया है। जीएसटी लागू होने से पहले डीलरों को 5 फीसदी मूल्य वद्र्घित कर (वैट) देना पड़ता था।

 
इंडिया इन्फोलाइन ने कहा, 'जीएसटी लागू होने के बाद पुरानी कारों का बाजार प्रभावित हुआ था लेकिन परिषद के फैसलों का अनुकूल प्रभाव होगा। इससे पहले जीएसटी के तहत कारों पर 28 फीसदी से लेकर 43 फीसदी तक कर लगता था।' पुरानी कारों पर जीएसटी दर में कटौती से मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड को फायदा होने की उम्मीद है क्योंकि कंपनी की कुल बिक्री में एक चौथाई योगदान पुरानी कारों का है। एंबुलेंस पर उपकर समाप्त होने से फोर्स मोटर्स लिमिटेड को फायदा होगा जो इस श्रेणी की सबसे बड़ी कंपनी है। ट्रूबिल के सह संस्थापक और मार्केटिंग प्रमुख शुभ बंसल ने कहा कि जीएसटी के बाद कंपनी के मुनाफे पर दबाव आ गया था लेकिन अब बाजार को राहत मिली है। उन्होंने कहा, 'हमारा मुनाफा 10 फीसदी के आसपास रहता था लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह घटकर 3 से 3.5 फीसदी रह गया था।' उन्हें उम्मीद है कि कंपनियां एक बार फिर छूट और ऑफर शुरू करेंगी। मुनाफे पर दबाव के कारण कई कंपनियों ने बड़े ऑफर रोककर रखे थे। बंसल ने कहा, 'जीएसटी दरों में कटौती का फायदा सीधे ग्राहकों को दिया जाएगा और हमें तुरंत बिक्री बढऩे की उम्मीद है। इस तिमाही में हमारी कंपनी की बिक्री 3 गुना बढ़ेगी।'
 
उद्योग के सूत्रों का कहना है कि करों में वृद्घि की भरपाई करने के लिए कई डीलरों ने पुरानी कारों की कीमत बढ़ाने के बजाय अपनी खरीद कीमत को कम किया था।  72 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ पुरानी कारों की सबसे बड़ी विक्रेता कंपनी ओएलएक्स इंडिया ने जीएसटी परिषद के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे ग्राहकों की धारणा मजबूत होगी और कारोबार आसान होगा। ओएलएक्स इंडिया के निदेशक (वाहन श्रेणी) सनी कटारिया ने कहा, 'इससे कीमतों में और गिरावट आएगी और ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर बिक्री के लिए पुरानी कारों की संख्या में तेजी आएगी। यह खरीदारों, विक्रेताओं और डीलरों सभी लिए सुखद स्थिति होगी।' अनुमान के मुताबिक देश में पुरानी कारों का सालाना बाजार करीब 35 लाख इकाई का है जिसमें से 40 फीसदी संगठित क्षेत्र में है। असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों पर जीएसटी का असर नहीं हुआ था क्योंकि उनका कारोबार बहुत कम था और उन्हें जीएसटी से छूट मिली है। लेकिन अब कंपनियों का छूट का खेल शुरू करने से उनका कारोबार प्रभावित हो सकता है।
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक