संकटग्रस्त संपत्तियों के हस्तांतरण में एनओसी से छूट!

अरुप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Jan 21, 2018 09:30 PM IST

ऋणशोधन और दिवालिया प्रक्रिया को थोड़ा सुगम बनाने के लिए और संकटग्रस्त संपत्तियों के अधिग्रहण को सरल और कारगर बनाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली परिसंपत्ति के हस्तांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र  की जरूरत को खत्म कर सकते हैं। यह प्रावधान आयकर कानून की धारा 281 के तहत आता है। दिवालियापन के तहत आने वाली कंपनियों और जो उनकी परिसंपत्ति की खरीदारी करने वाली कंपनियों के बीच लेन-देन में छूट दी जाएगी। इसके अलावा बजट में संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के हस्तांतरण पर स्टैंप शुल्क से भी मुक्ति मिल सकती है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा है कि न्यूनतम वैकल्पिक कर उन कंपनियों पर लागू नहीं होगा जो ऋणशोधन प्रक्रिया से गुजर रही हैं। इसके अलावा वित्त मंत्री का भाषण भी तीन सबसे बड़े 'बाधाकारी' सुधारों नोटबंदी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और दिवालिया कानून पर केंद्रित हो सकता है जिन पर हाल के वक्त में अमल किया गया। सूत्रों का कहना है कि जेटली सभी तीन उपायों पर एक रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे और सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अलावा नए ब्योरे का खुलासा कर सकते हैं। 

आयकर कानून 1961 की धारा 281 के मुताबिक करदाताओं को जमीन, इमारत, मशीनरी, विनिर्माण केंद्रों सहित अन्य परिसंपत्ति के हस्तांतरण से पहले मूल्यांकन अधिकारी से इजाजत लेने की जरूरत होगी। बजट की तैयारियों के बीच वित्त मंत्रालय और कंपनी मामलों के मंत्रालय के साथ संवाद करने वाले सूत्रों का कहना है कि संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करने वाली कंपनियों के लिए प्रावधान खत्म करने के लिए विचार विमर्श किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है, 'मैट (न्यूनतम वैकल्पिक कर) और स्टैंप शुल्क से जुड़े मसले के साथ-साथ नैशनल कंपनीज लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) के जरिये दिवालियां प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों की परिसंपत्ति हासिल करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने की कोशिश होगी।' कर्ज में फंसी परिसंपत्तियों को खरीदने की पात्र कंपनियों ने सरकार के सामने यह बात रखी है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। प्रत्येक राज्य में परिसंपत्ति खरीद पर स्टांप शुल्क में अंतर होता है। लेकिन दिवालिया प्रक्रिया केंद्र के तहत है ऐसे में स्टैंप शुल्क खत्म करने के किसी भी फैसले के लिए राज्यों के साथ विचार-विमर्श करना होगा। इस महीने की शुरुआत में सीबीडीटी ने कॉरपोरेट ऋणशोधन कार्यवाही का सामना कर रही कंपनियों पर मैट लगाने वाले नियमों को उदार बनाया था। पिछले साल 1 जुलाई को जीएसटी लागू होने के बाद से यह पहला बजट होगा ऐसे में 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में जेटली आवेदनों को सरल बनाने और विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की दरों में बदलाव के लिए जीएसटी परिषद और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बात कर सकते हैं।
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