बजट में कटौती से खुद निपटेगा रेलवे

शाइन जैकब | नई दिल्ली Jan 21, 2018 09:34 PM IST

केंद्र सरकार ने भारतीय रेलवे का बजट आवंटन घटाकर वित्त वर्ष 2017-18 के लिए 150 अरब रुपये कर दिया है। बहरहाल रेलवे उधारी, संपत्तियों  को बेचने और आंतरिक कमाई पर निर्भर होगा, जिससे वित्त वर्ष में पूंजीगत व्यय के 1.31 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रेलवे के लिए सकल बजटीय समर्थन 550 अरब रुपये रखा था, लेकिन राजस्व की कमी का संकट झेल रहे विभिन्न सरकारी विभागों से कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में सरकार का समर्थन कम किया जाएगा। बहरहाल 2017-18 के लिए पुनरीक्षित समर्थन 2016-17 के 463.5 अरब रुपये पुनरीक्षित अनुमान की तुलना में 13 प्रतिशत कम होगा। इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, 'पुनरीक्षित अनुमान के स्तर पर अब रेलवे को 400 अरब रुपये मिलेंगे।' 

रेलवे इस समय सुरक्षा और नवीनीकरण के काम पर जोर दे रहा है। अधिकारियों का विचार है कि सुरक्षा और कुल मिलाकर पूंजीगत व्यय पर इस कटौती का कोई असर नहीं पड़ेगा। अधिकारी ने कहा, 'सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध है। जीबीएस वित्तपोषण के स्रोतों में से एक है। जीबीएस में आई कमी को बजट के अतिरिक्त संसाधनों से पूरा कर लिया जाएगा।' बजटीय समर्थन में कमी की भरपाई करने के लिए रेलवे अब कई विकल्पों से धन जुटाने की योजना बना रहा है जिनमें संपत्ति का मुद्रीकरण, बाजार उधारी और संस्थागत वित्तपोषण शामिल है। दिलचस्प है कि सरकार ने 2018-19 के बजट में 1.46 लाख करोड़ रुपये योजनागत व्यय का जो प्रावधान किया था, उसमें से करीब 600 अरब रुपये जीबीएस से आने की उम्मीद लगाई गई थी। इसके बाद वित्त वर्ष के लिए उधारी से घन जुटाया जाना था। बजटीय समर्थन में कटौती के बाद से कुल पूंजीगत व्यय में बाजार उधारी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के पार जा सकती है, जबकि जीबीएस चालू वित्त वर्ष में गिरकर करीब 30 प्रतिशत रह सकता है। 

हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे 'शून्य जीबीएस' पर परिचालन करने को भी तैयार है। सूत्रों ने कहा कि गोयल का लक्ष्य रेलवे का बजटीय समर्थन से निर्भरता कम करना है।  सूत्रों ने संकेत दिए कि ऐसी स्थिति में आवंटित राशि में और कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पिछले 3 वित्त वर्षों में जीबीएस 2014-15 में 316 अरब रुपये, 2015-16 में 346 अरब रुपये और 2016-17 में करीब 400 अरब रुपये रहा है। 2014-15 से शुरू 5 वर्षों के लिए रेलवे ने 8.56 लाख करोड़ रुपये की बड़ी निवेश योजना बनाई थी। इसमें से करीब 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, '2009-14 के बीच जहां औसत पूंजीगत निवेश महज 459 अरब रुपये रहा, वहीं हमने इसे 2017-18 में 131 अरब रुपये बढ़ाया है और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता पर है।'

सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में है। सरकार पुरानी सिगनल व्यवस्था की मरम्मत पर निवेश योजना की घोषणा कर सकती है, जिस पर अनुमानित लागत 600 अरब रुपये रहने की संभावना है। इसकी घोषणा बजट में हो सकती है। अगले दो साल में रेलवे कम से कम 8,000 किलोमीटर पुराने ट्रैक बदलेगी, जिस पर 100 अरब रुपये निवेश होगा। दिलचस्प है कि 5 साल के लिए प्रस्तावित 8.56 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय में से 30 प्रतिशत बजटीय सहायता से मिलने वाला था। वहीं 28 प्रतिशत कर्ज से और करीब 15 प्रतिशत आंतरिक स्रोतों से लिया जाना था। इसमें से ज्यादा धनराशि का खर्च नेटवर्क पर बोझ कम करने जिसमें माल गलियारा और विद्युतीकरण (1.99 लाख करोड़ रुपये), नेटवर्क विस्तार और सुरक्षा पर होना है।
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