लक्ष्य के पास होगा राजकोषीय घाटा

अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली Jan 22, 2018 09:48 PM IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली जब 1 फरवरी को 2018-19 का बजट पेश करेंगे तो वह 2017-18 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बजट में तय 3.2 प्रतिशत लक्ष्य के करीब होने की घोषणा कर सकते हैं। अतिरिक्त उधारी, प्रमुख योजनाओं मेंं अनुमान से ज्यादा खर्च और वस्तु और सेवा कर और स्पेक्ट्रम बिक्री से आमदनी में अनुमानित गिरावट के बावजूद ऐसा होने की संभावना है।  वित्त वर्ष 2017-18 के पहले अग्रिम अनुमानों में अतिरिक्त योजनागत उधारी 200 अरब रुपये रखी गई थी और अगर सभी अन्य कारक समान रहते हैं तो राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.35 प्रतिशत हो सकता है।  लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अगर राष्ट्रीय लघु बचत योजना का 200 अरब रुपये न निकाला जाए तो इसे कम किया जा सकता है और राजकोषीय घाटे को नीचे लाया जा सकता है और राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के आसपास हो सकता है। 
 
बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक राजकोषीय लक्ष्य से ज्यादा विचलन न होने पाए, इसके लिए वित्त मंत्रालय तीन मोर्चे पर काम कर रहा है। अन्य विभागोंं से बिना खर्च की गई राशि को वापस मांगा जा रहा है या सकल बजटीय समर्थन में कटौती की जा रही है, कुछ व्यय मदों को आगे ले जाया जा रहा है, जिसमें सब्सिडी का भुगतान शामिल है। इसके अलावा केंद्र व राज्य के बीच एकीकृत जीएसटी का समान बटवारा शामिल है।  रेल मंत्रालय में पहली बार यह होने जा रहा है कि वित्त मंत्रालय सकल बजटीय समर्थन में 150 अरब रुपये की कटौती कर सकता है। रक्षा मंत्रालय के पास कई अरब रुपये बगैर खर्च किए पड़ा रहता है, जिसे मंत्रालय बीते वर्षों में वापस करता रहा है। पिछले साल करीब 70 अरब रुपये वापस आ गए थे।  एक अधिकारी ने कहा, 'विभाग या तो खर्च न हुआ धन वापस कर देते हैं या अगर उन्हें धनराशि की जरूरत नहींं होती है तो आवंटन नहीं किया जाता है। लेकिन इस साल उनसे कहा गया है कि वे अपने खातों की गहराई से देखें।' उन्होंने कहा कि इस साल जीएसटी लागू होने और राजस्व अनुमान मेंं अनिश्चितता के कारण हर रुपये का महत्त्व है। 
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