बढ़ सकता है पूंजीगत व्यय

अरूप रायचौधरी | नई दिल्ली Jan 23, 2018 09:45 PM IST

वित्त मंत्री अरुण जेटली चाहते हैं कि नए वित्त वर्ष में भी केंद्र व राज्यों की मालिकाना वाली कंपनियां बुनियादी ढांचे पर बड़ी मात्रा में खर्च का बोझ उठाएं। केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2018-19 में 3.6 लाख करोड़ रुपये हो सककता है, जो वित्त वर्ष 2017-18 के 3.09 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से 16 प्रतिशत यानी 510 अरब रुपये ज्यादा होगा।  बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) और केंद्र सरकार का संयुक्त पूंजीगत व्यय का लक्ष्य आराम से 4.2 लाख करोड़ रुपये पार कर जाएगा। यह किसी भी दिए गए वर्ष की तुलना में सबसे ज्यादा होगा और यह इसके पहले के उच्चतम स्तर से बहुत ज्यादा होगा। 
 
जेटली द्वारा 1 फरवरी को पेश किया जाने वाला 2018-19 का बजट 2019 में होने वाले आम चुनाव के पहले मौजूदा सरकार का आखिरी बजट होगा। इस बजट के लोकलुभावन होने की उम्मीद नहीं की जा रही है, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर सार्वजनिक व्यय होगा। अधिकारियों ने कहा कि सड़क, रेलवे और किफायती मकान जैसे क्षेत्रों में व्यय बढ़ाने से नौकरियों के सृजन में मदद मिलेगी।  अधिकारी ने कहा, 'बैंकों की बैलेंंस सीट साफ करने की प्रक्रिया चल रही है, वहीं लंबित चल रही कुछ परियोजनाओं को भी मंजूरी देनी होगी। साथ ही निजी क्षेत्र को कर्ज देने की प्रक्रिया भी गति पकड़ेगी। निजी क्षेत्र अभी भी केंद्र सरकार व पीएसयू के पूंजीगत व्यय से मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। ऐसे में बोझ केंद्र सरकार पर होगा।'
 
केंद्र व पीएसयू का संयुक्त पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 2017-18 में 3.85 लाख करोड़ रुपये था। इस साल की शुरुआत में केंद्र सरकार ने इस बात पर जोर दिया था कि राज्य सरकार की मालिकाना वाली कंपनियां पूंजीगत व्यय के रूप में 250 अरब रुपये अतिरिक्त व्यय करें। 250 अरब रुपये का इस साल अतिरिक्त आवंटन होगा, जिससे पूंजीगत व्यय 4.1 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। 
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