अक्षय ऊर्जा की शुल्क दरों में गिरावट से दबाव

श्रेया जय | नई दिल्ली Jan 29, 2018 09:52 PM IST

सौर एवं पवन ऊर्जा की दरों में रिकॉर्ड गिरावट के बीच राज्यों में बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) को लेकर चिंता बढ़ रही है। दरअसल राज्यों ने ऊंची दरों पर ये समझौते किए थे। आर्थिक समीक्षा 2018 में इस मसले का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पीपीए पर पुनर्विचार की स्थिति से बचने के लिए मौजूदा सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाओं पर गौर करने की जरूरत है। आर्थिक समीक्षा कहती है, 'नीलामी के चलते बिजली दरों के काफी नीचे आ जाना भले ही एक स्वागत-योग्य खबर है लेकिन इससे बिजली खरीद समझौतों पर नए सिरे से विचार करने की मांग बढ़ सकती है। कुछ वितरण कंपनियों ने ऊंची दरों पर हुए पीपीए पर दोबारा विचार करने के संकेत भी दिए हैं।'
 
पिछले साल नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली की दरें 2.44 रुपये प्रति यूनिट तक आ गई थीं जो कि छह वर्षों में 80 फीसदी गिरावट है। बिजली दरों के इतना कम हो जाने से राज्यों की बदहाल बिजली वितरण कंपनियां पुराने खरीद समझौतों में बदलाव चाह रही हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में तो वितरण कंपनियों ने महज एक साल पहले हुए समझौतों को निरस्त ही कर दिया है।
कीवर्ड power, economic survey, Arvind Subramanian, budget, arun jaitley,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक