मकानों की बिक्री 5 साल के निचले स्तर पर

करण चौधरी | नई दिल्ली Jan 29, 2018 10:36 PM IST

आर्थिक समीक्षा 2017-18

आर्थिक समीक्षा 2017-18 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में बिक्री 2017-18 में पांच साल के निचले स्तर पर रह गई है और बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष  विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिए बाजार धारणा में सुधार इस क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी होगा। जहां वर्ष 2017 की पहली छमाही में आवासीय रियल एस्टेट बाजार में बिक्री सिर्फ 58,000 यूनिट दर्ज की गई, वहीं नए मकानों की बिक्री इस अवधि के दौरान लगभग 101,850 यूनिट के साथ पांच वर्ष के निचले स्तर पर रह गई। समीक्षा में कहा गया है कि पहली छमाही के दौरान बिक्री पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 38 फीसदी तक घटी है, जबकि समान अवधि में परियोजनाओं के लॉन्च में 56 प्रतिशत तक की कमी आई। 

समीक्षा के अनुसार रियल एस्टेट क्षेत्र (मकानों का स्वामित्व शामिल) की भागीदारी 2015-16 में भारत की कुल सकल वैल्यू में 7.7 फीसदी रही। समीक्षा में कहा गया है, 'इस क्षेत्र की वृद्धि पिछले तीन वर्षों में घटी है। जहां 2013-14 में यह वृद्धि 7.5 फीसदी थी तो 2013-15 में घटकर 6.6 फीसदी और 2015-16 में 4.4 फीसदी रह गई। यह गिरावट मुख्य रूप से ड्ïवेलिंग सेगमेंट के स्वामित्व में वृद्धि की वजह से आई है। इस सेगमेंट का कुल जीवीए में 6.8 फीसदी का योगदान है। वहीं निर्माण क्षेत्र (भवन, बांध, सड़कें, पुल आदि शामिल) की वृद्धि 2015-16 के 5 फीसदी से घटकर 2016-17 में 1.7 प्रतिशत रह गई।'

वर्ष 2017 की पहली छमाही के दौरान भारत के प्रमुख 14 शहरों में आवासीय परियोजनाओं की पेशकश पिछले पांच साल में सबसे निचले स्तर पर रही। समीक्षा में यह स्वीकार किया गया है कि पिछले वर्ष पेश किए गए रियल एस्टेट (नियमन एवं विकास) ऐक्ट (रेरा), के साथ साथ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का आवासीय बाजार पर प्रभाव पड़ा।

समीक्षा में कहा गया है कि हालांकि महज कुछ अवधि को छोड़कर इन सुधारों (रेरा और जीएसटी) से गैर-बिके आवासों के स्तर में सुधार लाने में मदद मिली। जहां अप्रैल 2016 में बिना बिके मकान 888,373  थे वहीं अक्टूबर 2017 में यह घटकर लगभग 807,903 यूनिट रह गए।  समीक्षा में रियल एस्टेट में एफडीआई पर उत्साहजनक रुख अपनाया गया है। हालांकि वर्ष 2016 में विदेशी फंडों से निवेश 5.9 अरब डॉलर था लेकिन वर्ष 2017 में यह थोड़ा नरम पड़कर 5 अरब डॉलर रह गया। 

समीक्षा में दावा किया गया है कि हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ साथ कई विकास-केंद्रित सुधारों की पेशकश से रियल एस्टेट क्षेत्र को अच्छा निवेश आकर्षित करने में मदद मिल रही है।  इसमें कहा गया है, 'यह सकारात्मक रुझान कई कारकों से जुड़ा हुआ है जिनमें नियामकीय परिदृश्य, व्यापक बुनियादी ढांचा, और रेरा में संशोधन मु?य रूप से शामिल हैं। इन नीतिगत पहलों से पारदर्शिता बढऩे और इस क्षेत्र को बेहतर ढंग से संगठित बनने में मदद मिलने की संभावना है, जिससे निवेश बढ़ रहा है।' रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े कुछ ताजा सुधारों और नीतियों में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) भी मुख्य रूप से शामिल है जिसमें सरकार ने नवंबर 2017 तक शहरी क्षेत्रों में किफायती आवास खंड के लिए 31 लाख से अधिक मकानों के लिए स्वीकृति दी।
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