राजमार्गों, ग्रामीण सड़कों पर खर्च ज्यादा, मगर काम की धीमी रफ्तार

अभिषेक वाघमारे |  Jan 31, 2018 09:58 PM IST

संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक इस वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में देश में राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों में पूंजीगत खर्च की तुलना में काम बहुत कम हुआ है जबकि रेलवे में खर्च के अनुरूप निर्माण हुआ है। नवंबर 2017 तक राजमार्गों पर 73 फीसदी पूंजी खर्च की जा चुकी थी लेकिन केवल 33 फीसदी नियोजित राजमार्गों पर ही काम पूरा हुआ है। इसी तरह ग्रामीण सड़कों का बजट भी बहुत ज्यादा खर्च हो चुका है लेकिन केवल 25 फीसदी नियोजित ग्रामीण सड़कों का ही उन्नयन किया गया है। अलबत्ता बस्तियों को सड़कों से जोडऩे का काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

 
दूसरी ओर रेलवे ने अपने बजट का 60 फीसदी हिस्सा खर्च किया है और उनके निर्माण की गति इसके अनुरूप रही है। केंद्र सरकार के बजट में रक्षा क्षेत्र के बाद सड़क (राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों सहित) और रेलवे को ही सबसे ज्यादा पूंजीगत खर्च मिलता है। देश का रक्षा बजट जहां 1.3 लाख करोड़ रुपये का है वहीं सड़क और रेलवे का बजट 865 अरब रुपये है जो कि पूंजीगत खर्च का एक बड़ा हिस्सा है। इसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमएसजीवाई) के तहत आने वाली ग्रामीण सड़कें भी शामिल हैं जिसके लिए 190 अरब रुपये का प्रावधान है। वर्ष 2017-18 के बजट में कुल 21.5 लाख करोड़ रुपये के खर्च में 3,100 अरब रुपये पूंजीगत व्यय का अनुमान जताया गया था। यानी कुल खर्च में पूंजीगत व्यय का हिस्सा करीब 14 फीसदी था। पूंजीगत व्यय के मद में जल्दी रकम दिए जाने के बावजूद इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में राजमार्ग और ग्रामीण सड़कों के निर्माण में अपेक्षित परिणाम नहीं आए हैं।  ग्रामीण सड़कों के लिए निर्धारित 190 अरब रुपये के बजट में से नवंबर तक केवल 40 फीसदी यानी 77 अरब रुपये ही खर्च हुए हैं। अलबत्ता पीएमजीएसवाई के तहत इस दौरान तीन-चौथाई बस्तियों को सड़कों से जोड़ दिया गया है। लेकिन मौजूदा सड़कों के उन्नयन और इनके इर्दगिर्द सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए शुरू की गई पीएमजीएसवाई-द्वितीय के तहत केवल एक चौथाई काम ही पूरा हुआ है। 
 
रेलवे
 
भारतीय रेलवे के लिए बजट में 550 अरब रुपये आवंटित किए गए थे, जिनमें से 212 अरब रुपये नई लाइनों के निर्माण के लिए थे। इस वित्त वर्ष के दौरान 3,600 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने का लक्ष्य है जिसमें से पिछले साल नवंबर तक 56 फीसदी यानी 2,000 किमी काम पूरा हुआ था। नई लाइनों के अलावा इस वित्त वर्ष में दिसंबर तक 130 रेल ओवरब्रिज और 332 अंडरब्रिजों का भी निर्माण हुआ है। इसी तरह रेलवे ने इस वित्त वर्ष के दौरान 4,000 किमी रेल लाइन के विद्युतीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया था लेकिन इसमें से अब तक कितना काम हो पाया है, इस बारे में आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। देश में रेलवे का कुल नेटवर्क 67,368 किमी है जिसमें से करीब आधा यानी 37,844 किमी नेटवर्क का विद्युतीकरण नहीं हो पाया है। इसके लिए 3,200 मेगावाट बिजली की जरूरत है। रेल मंत्रालय के मुताबिक इसके लिए 326 अरब रुपये की जरूरत होगी। यानी हर 116 किमी रेल लाइन के विद्युतीकरण का खर्च एक अरब रुपये होगा। राजस्व व्यय के मामले में रेलवे नवंबर तक 929 अरब रुपये खर्च कर चुका था जबकि उसका नियोजित खर्च 916 अरब रुपये है। 
 
ग्रामीण सड़कें 
 
ग्रामीण सड़कों के लिए बजट में 190 अरब रुपये का आवंटन किया गया था जिसमें से नवंबर तक 77 अरब रुपये ही खर्च हुए थे। नवंबर तक पीएमजीएसवाई के पहले चरण के तहत 178,000 बस्तियों में से 131,000 को नई या उन्नत सड़कों से जोड़ा जा चुका था। पीएमजीएसवाई के दूसरे चरण के तहत 50,000 किमी में से नवंबर तक 12,456 किमी सड़कों का ही उन्नयन हुआ था। यानी वित्त वर्ष के दो-तिहाई हिस्से में केवल 25 फीसदी काम ही हुआ है।
 
राजमार्ग
 
देश में राजमार्गों के निर्माण की गति धीमी है। वित्त वर्ष 2018 के दौरान 15,000 किमी राजमार्गों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जिसमें से नवंबर तक केवल 4,942 किमी यानी 33 फीसदी काम ही पूरा हुआ था। पूर्वोत्तर में राजमार्गों के निर्माण की रफ्तार ज्यादी धीमी है। वहां इस वित्त वर्ष के दौरान नियोजित 1,052 किमी सड़कों में से नवंबर तक केवल 256 किमी सड़क ही बनाई गई थी। राजमार्गों की 276 परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं। इसमें से कुछ को तो 2006 में ही पूरी करने का लक्ष्य था। संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक केंद्र ने वित्त वर्ष 2018 में मेट्रो रेल परियोजनाओं के लिए 178 अरब रुपये का प्रावधान किया था जिसमें से दिसंबर तक 118 अरब रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सरकार आंकड़ों के मुताबिक शहरी विकास के लिए निर्धारित 193 अरब रुपये में से नवंबर तक 109 अरब रुपये खर्च किए जा चुके थे।
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