मोदीकेयर के लिए कॉरपोरेट अस्पतालों को बदलना पड़ेगा मॉडल

अनीश फडणीस | मुंबई Feb 02, 2018 10:16 PM IST

सरकार के प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से रोगियों की पहुंच बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवा लागत में भी कमी आएगी। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि इस अवसर को भुनाने के लिए कॉरपोरेट अस्पतालों को अपने कारोबारी मॉडल में निश्चित तौर पर बदलाव करना पड़ेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को अपने बजट भाषण में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत अस्पतालों में भर्ती होने के खर्च के लिए 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का कवर देने की घोषणा की है। उन्होंने संकेत दिया कि यह योजना सार्वभौम स्वास्थ्य सेवा की ओर उठाया गया पहला कदम था। इसके दायरे में और अधिक परिवारों को लाया जाएगा जो इसकी सफलता पर अधारित होगा। फिलहाल अधिकांश स्वास्थ्य सेवा खर्च लोगों की जेब से बाहर है और महज 20 फीसदी आबादी को ही स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध है।
 
जेफरीज के विश्लेषक सोमशंकर सिन्हा ने बजट बाद अपने नोट में कहा, 'सरकार द्वारा बीमा कवरेज में बढ़ोतरी करने का मतलब अस्पतालों के लिए रोगियों की संख्या में वृद्धि है क्योंकि इससे लोगों की खर्च करने की शक्ति बढ़ेगी। इस योजना के जरिये आबादी के एक बड़े हिस्से की निजी स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच सुनिश्चित होगी। हालांकि इससे सरकार की मोलभाव करने की ताकत भी बढ़ेगी जिससे कीमतों में कमी आएगी।' इस योजना से सस्ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र और बड़ी अस्पताल शृंखलाओं को बल मिलेगा लेकिन मांग में तेजी को भुनाने के लिए उन्हें अपने कारोबारी मॉडल को भी नए सिरे से तैयार करने की जरूरत होगी। सिन्हा ने कहा, 'इस योजना के तहत मांग में होने वाली वृद्धि किफायती सेवाओं के आधार पर होगी और टियर-2 शहरों में भी उसमें तेजी आएगी। हालांकि इस बाजार के लागत ढांचे और पूंजीगत व्यय मॉडल के कारण कॉरपोरेट अस्पतालों को उसे भुनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां तक कि कई सूचीबद्ध अस्पताल संकेत भी दे चुके हैं कि प्रमुख केंद्रों पर सरकारी योजना वाले रोगी लाभप्रद नहीं होते। इसलिए कंपनियों को एक मानक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लागत घटाने के लिए काम करना पड़ेगा और इस क्षेत्र को भुनाने के लिए डॉक्टरों के साथ एक नई नीति तैयार करनी पड़ेगी ताकि इस सरकारी पहल का फायदा उठाया जा सके।'
 
एडलवाइस सिक्योरिटीज के दीपक मलिक का मानना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से देश में स्वास्थ्य सेवा पर होने वाला खर्च तीन गुना बढ़कर 300 अरब डॉलर होने की संभावना है। वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2022 के बीच इसमें 20 फीसदी से अधिक सीएजीआर के साथ वृद्धि होगी। मलिक ने कहा, 'इस पहल के लिए सरकार का कुल परिव्यय अपने चरम अवस्था में 100 अरब रुपये होगा जिसे संबंधित राज्य सरकारों के साथ साझा किया जाएगा। हालांकि इस स्तर पर इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी, लेकिन हमारा मानना है कि सस्ती स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के अस्पतालों को इससे लाभ होगा। अपोलो हॉस्पिटल्स, मैक्स इंडिया और फोर्टिस हेल्थकेयर जैसे हाई-एंड सेवा प्रदाता यदि अपने कारोबारी मॉडल में बदलाव नहींं करेंगे तो इस अवसर को भुनाने से चूक जाएंगे।'
 
वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स ग्रुप की प्रबंध निदेशक जहाबिया खोराकीवाला ने कहा, 'अस्पतालों में निवेश व्यवहार्यता का मामला है और इसलिए इस योजना की निवेश क्षमता का आकलन करना फिलहाल जल्दबाजी होगी। यदि सबकुछ वाणिज्यिक तौर पर व्यावहारिक रहा तो इससे निवेश के लिए एक बड़ा बाजार खुलेगा।'
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