विद्युत और सौर क्षेत्र पर बढ़ेगा लागत दबाव

श्रेया जय | नई दिल्ली Feb 02, 2018 10:17 PM IST

सभी उत्पादों के आयात पर 10 प्रतिशत अधिभार से विद्युत क्षेत्र प्रभावित होगा। इससे विद्युत उपकरण और निर्माण उद्योग की लागत बढऩे की आशंका है।  चूंकि विद्युत उद्योग में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर उपकरण निर्धारित लागत अनुबंध पर थोक में ऑर्डर किए जाते हैं, इसलिए कीमत वृद्घि से बिजली दरों की लागत संरचना पर 60 प्रतिशत से ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है। इंडियन इलेक्ट्रिकल ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन (आईईईएमए) के उपाध्यक्ष हरीश अग्रवाल ने कहा, 'विद्युत क्षेत्र के सभी वैल्यू चेन से जुड़े ज्यादातर उत्पाद जिंस कीमतों द्वारा नियंत्रित हैं जो पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी है। इसलिए आयात पर ज्यादा अधिभार लगने से इनकी लागत बढ़ जाएगी। निर्धारित कीमत पर थोक में खरीदे जाने वाले एल्युमीनियम कंडक्टर, वायर आदि जैसे उत्पादों की लागत बढ़ेगी। इन उत्पादों का बिजली की कुल लागत में 60 प्रतिशत का योगदान है।' अग्रवाल ने कहा कि बेहद अस्थिर बाजारों में निर्यात के संदर्भ में भारत अपनी प्रतिस्पर्धी बढ़त खो देगा।
 
इसी तरह का प्रभाव सोलर पैनलों पर दिखेगा जिन्हें मुख्य रूप से आयात किया जाता है। भारत की सौर बिजली का 80 प्रतिशत हिस्सा आयातित सामग्री पर आधारित है। पिछले साल से सोलर पैनल पर 7.5 प्रतिशत का सीमा शुल्क लागू है। इस सेक्टर के अधिकारियों का कहना है कि इन पर 10 प्रतिशत का अधिभार पैनलों की लागत बढ़ा देगा और इससे कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं। यह अधिभार ऐसे समय में थोपा गया है जब इस उद्योग को चीन और मलेशिया से सोलर पैनल आयात पर सेफगार्ड और एंटी-डम्पिंग शुल्क की आशंका भी बरकरार है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सेफगाड्ïर्स ड्यूटी (डीजीएस) ने सोलर सेल की डम्पिंग की जांच से संबंधित अपनी संसदीय रिपोर्ट में चीन से आयात पर 70 प्रतिशत शुल्क का सुझाव दिया। उद्योग का मानना है कि इस शुल्क से सौर दरों में 1-2 प्रतिशत की वृद्घि संभावित है।  चूंकि बिजली को जीएसटी के दायरे में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए किसी तरह का इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा, अधिभार की वजह से लागत में वृद्घि का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। 
 
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