ई-वे बिल की शुरुआत में ही थमा कारोबार

बीएस संवाददाता | नई दिल्ली Feb 04, 2018 09:51 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का ई-वे बिल शुरुआती हिचकोलों के बाद भले ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया हो, गुजरात के ट्रांसपोर्टर अभी भी लदान को लेकर परेशान हैं। सूरत से रोजाना 400 ट्रक कपड़ा जाता है, लेकि न शनिवार को सिर्फ 15-20 ट्रक गए। सूरत टेक्सटाइल गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष युवराज देसाले ने कहा, 'ज्यादातर (ट्रांसपोर्टर) इस बात से डरे हैं कि फील्ड ऑफिसर उनका उत्पीडऩ करेंगे।' सिर्फ कपड़ा उद्योग को ही गुरुवार को 75-80 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिस दिन ई-वे बिल की शुरुआत हुई और उसके बाद इसे वापस ले लिया गया। 
 
गुजरात में कुल 2,350 जिंसों मेंं से सिर्फ 19 पर ई-वे बिल की प्रक्रिया पेश की गई, जिससे इसका परीक्षण किया जा सके। देश के शेष हिस्सों की तरह यहां भी इसे तकनीकी समस्याओं से जूझना पड़ा।  गुरुवार को ई-वे बिल पोर्टल ने दोपहर के करीब काम करना बंद कर दिया। देर रात तक सरकार ने ट्वीट किया कि परीक्षण चरण को राज्य के भीतर और एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही के मामलों में बढ़ाया जाएगा। ई-वे बिल को फिर से पेश किए जाने की तिथि की घोषणा जल्द की जाएगी।
 
वित्त सचिव हसमुख अढिय़ा ने कहा, 'यह हमारी पहुंच से दूर नहीं है।' उन्होंने कहा कि सरकार ने ई-वे बिल को इसलिए लंबित कर दिया क्योंकि वह नहीं चाहती कि तकनीकी समस्याओंं की वजह से होने वाली देरी से कारोबार प्रभावित हो। उन्होंने कहा, 'पहले दिन तमाम लोगों ने लॉग इन की कोशिश की। हमें कुछ तकनीकी समस्याएं नजर आईं और सिस्टम थोड़ा सुस्त हो गया। ई-वे बिल एक मिनट के भीतर बनना चाहिए।' वित्त सचिव ने कहा कि ईवे बिल एक सप्ताह में या उसके बाद फिर से पेश किया जाएगा। 
 
वस्तु एवं सेवाओंं की आवाजाही न सिर्फ गुजरात में बल्कि देश के तमाम इलाकों में प्रभावित हुई, जिससे आरोप प्रत्यारोप बढ़े। अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सर्वर से समस्या हुई। बहरहाल उद्योग जगत ने आरोप लगाया कि सरकार ने जल्दबाजी मेंं ई-वे बिल लागू करने की कवायद की।  एक वरिष्ठ कर सलाहकार ने कहा, 'सरकार ने बहुत ज्यादा ट्रैफिक का अनुमान नहीं लगाया था। इसके अलावा कुछ अधिसूचनाएं अंतिम समय में आईं, जिससे भ्रम पैदा हुआ।' उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था 21 फरवरी से फिर शुरू हो सकती है। 
 
पश्चिम बंगाल का चमड़ा उद्योग 16.4 करोड़ रुपये से ज्यादा का निर्यात करता है, जो सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोट्र्स के चेयरमैन (पूर्वी) रमेश जुनेजा ने कहा कि कच्चे माल की खरीद और तैयार चमड़े में अंतर इसकी एक वजह रही। यहां तक कि ई-वे बिल के दायरे से बाहर रखा गया रत्न एवं आभूषण उद्योग भी प्रभावित हुआ है।  आल इंडिया जेम्स ऐंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन के पूर्व चेयरमैन बछराज बामालवा ने कहा, 'राज्य सरकार ने सोने और कीमती पत्थरों के लिए रास्ते का बिल जारी किया। सरकार ने 1 फरवरी को बिल लंबित कर दिया, जब ई-वे बिल पेश किया गया।' उन्होंने कहा कि अब ई-वे बिल अस्थायी रूप से वापस ले लिया गया है, फिर भी रत्न एवं आभूषण की आवाजाही रुकी हुई है। 
 
तमिलनाडु और केरल मेंं राज्य के बाहर भेजे जाने वाला माल कारोबारियोंं के गोदामों में पड़ा रहा। एक कारोबारी ने कहा कि सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। एक और कारोबारी ने कहा कि ई-वे बिल  तैयार करने मेंं 6 घंटे लगे। तमिलनाडु चैंबर आफ कॉमर्स ऐंंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष एन जगनाथीसन ने कहा कि ज्यादातर करदाताओंं को अभी भी ई-वे बिल के प्रावधानों के बारे में जानकारी नहीं है। तेलंगाना में ई-वे बिल में तेजी देखी गई। खपत वाला राज्य होने के कारण सालाना आधार पर राज्य के मूल्यवर्धित कर प्राप्तियों मेंं 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। अधिकारियों को उम्मीद है कि जीएसटी के तहत प्रदर्शन टिकाऊ रहेगा। 
 
(दिलाशा सेठ, विनय उमरजी, अभिषेक रक्षित, टीई नरसिम्हन, दशरथ रेड्डी और रघु कृष्णन के सहयोग से)
कीवर्ड e way bill, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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