सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को बजट आवंटन घटा

ईशान बख्शी | नई दिल्ली Feb 04, 2018 09:51 PM IST

नकदी की कमी से जूझ रही केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसई) के पूंजीगत व्यय के लिए बजट राशि 2018-19 में घटाकर 1.76 लाख करोड़ रुपये कर दी है, जो 2017-18 के 1.82 लाख करोड़ रुपये पुनरीक्षित अनुमान (आरई) की तुलना में कम है। बहरहाल अगर पीएसयू बैंकों के पुनर्पूंजीकरण का काम किया जाता है तो यह दृश्य अलग नहीं होगा।  पीएसयू से उम्मीद की गई है कि वे वित्त वर्ष 19 में अपने आंतरिक संसाधनोंं से 4.78 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय करेंगी, जो वित्त वर्ष 18 के 4.76 लाख करोड़ रुपये से मामूली ज्यादा है। 
 
वहीं पीएसई के लिए कुल पूंजीगत आवंटन वित्त वर्ष 19 में 6.54 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो वित्त वर्ष 18 (आरई) के 6.59 लाख करोड़ रुपये की तुलना में कम है। इससे पता चलता है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रतिशत के रूप में पीएसई का पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 19 में गिरकर जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रह जाएगा, जो वित्त वर्ष 18 में 3.9 प्रतिशत था।  इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए देखें तो केंद्र सरकार का कुल पूंजीगत व्यय मामूली गिरकर वित्त वर्ष 19 में 1.60 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 18 (आरई) में जीडीपी का 1.63 प्रतिशत था। इससे निवेश चक्र बहाल होने के संकेत नहीं मिलते हैं। निजी क्षेत्र से निवेश अभी भी सुस्त है, ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र से होने वाला निवेश बहुत अहम हो जाता है, जिससे निवेश में तेजी आ सके। 2017-18 में केंद्र सरकार ने पीएसयू के लिए बजट समर्थन 1.15 लाख करोड़ रुपये किया था। लेकिन सरकार 800 अरब रुपये सरकारी बैंकों के पुनर्पूंजीकरण पर खर्च कर रही है, ऐसे में पीएसयू को कुल समर्थन 1.82 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। केंद्र ने वित्त वर्ष 19 में बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिएओ 650 अरब रुपये आवंटित किए हैं। 
 
अगर बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए आवंटित राशि को शामिल कर लिया जाए तो पीएसयू को बजट समर्थन वित्त वर्ष 19 में 8.6 प्रतिशत बढ़ा है। दिलचस्प है कि वित्त वर्ष 18 (बीई) में कुल पूंजीगत आवंटन 5 लाख करोड़ रुपये रहा है, वहीं पीएसयू का व्यय बढ़कर 6.59 लाख करोड़ रुपये (आरई) हो गया है और इसमें करीब 32 प्रतिशत की तेजी आई है।  रेलवे द्वारा पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 19 में बढ़कर 1.46 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। हालांकि वित्त वर्ष 18 (आरई) में यह  1.2 लाख करोड़ रुपये रह गया, जबकि लक्ष्य 1.31 लाख करोड़ रुपये का था। 
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