उपकर व अधिभार से 3.02 लाख करोड़ रुपये जुटाएगा केंद्र

ईशान बख्शी | नई दिल्ली Feb 11, 2018 09:41 PM IST

केंद्र सरकार को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2018-19 में अधिभार और उपकर से कुल संग्रह 3.02 लाख करोड़ रुपये होगा, जो 2017-18 के पुनरीक्षित अनुमान 2.78 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.5 प्रतिशत ज्यादा है। यह राजस्व सीधे केंद्र सरकार के पास आता है और इसमें राज्यों को हिस्सेदारी नहीं मिलती। इन आंकड़ों के मुताबिक केंद्र का कुल पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 19 में बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगा।  14वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि राज्य व केंद्र के बीच जिन करों का बंटवारा होता है, उनमें राज्य की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया जाना चाहिए। विभाजित होने वाले करों मेंं केंद्र सरकार द्वारा संग्रह किए गए सभी कर आते हैं, जिसमें अधिभार और उपकर शामिल नहीं हैं, जो किसी खास प्रयोजन से एकत्र किया जाता है।
 
वित्त वर्ष 19 मेंं केंद्रीय करों मेंं राज्यों की हिस्सेदारी बढ़कर 7.88 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो वित्त वर्ष 18 में 6.73 लाख करोड़ रुपये था।  वित्त  वर्ष 19 में केंद्र व राज्यों के बीच विभाजित होने वााले कर का संग्रह 18.76 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 18 में 16.02 लाख करोड़ रुपये था।  वित्त वर्ष 18 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के 613 अरब रुपये और वित्त वर्ष 19 में 900 अरब रुपये के मुआवजा उपकर के समायोजन के बाद जीएसटी की वजह से किसी तरह का नुकसान नहीं होगा, क्योंकि केंद्र का उपकर और अधिभार संग्रह वित्त वर्ष 19 मेंं करीब 3.01 लाख करोड़ रुपये होगा, जो इसके पहले के साल की तुलना में 8.5 प्रतिशत ज्यादा है। 
 
वित्त वर्ष 18 मेंं केंद्र सरकार ने इस माध्यम से 2.78 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे, जबकि बजट में 2.95 लाख करोड़ रुपये था। इस मद में लक्ष्य से 170 अरब रुपये कम एकत्र हुुए थे। यह कमी इस वजह से आई कि  अप्रत्यक्ष कर पर लगने वाले कुछ उपकर एवं अधिभार को जीएसटी मेंं शामिल कर लिया गया था।  स्वच्छ भारत उपकर और कृषि कल्याण उपकर का उदाहरण लिया जा सकता है, जिसे सेवा कर मेंं शामिल कर लिया गया। वित्त वर्ष 18 में केंद्र सरकार ने अनुमान लगाया था कि इस मद मेंं क्रमश: 133 अरब रुपये और 88 अरब रुपये एखत्र होंगे। लेकिन जुलाई में जीएसटी लागू होने से इस मद में क्रमश: 41 अरब रुपये और 27 अरब रुपये का संग्रह हुआ। 
 
जीएसटी के कारण हुए इस बदलाव से सरकार के सामने एक और राजकोषीय जटिलता सामने आ गई है। उपकर और अधिभार से मिलने वाला राजस्व पूरी तरह केंद्र के पास रहता है, जो किसी खास योजना के लिए चिह्नित होता है। लेकिन अब कुछ कर एवं अधिभार नहीं लगाए जा रहे हैं, जिसकी वजह से उसके ये कर राज्यों के साथ बंटवारे वाले कर के मद मेंं चले गए हैं। इससे कुल मिलाकर केंद्र की राजस्व जरूरतों में बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के लिए अगर सरकार किसी कार्यक्रम के लिए पहले 100 करोड़ रुपये एकत्र करती थी तो उस योजना के वित्तपोषण की जरूरतें पूरी करने के लिए अब सरकार को 172.41 करोड़ रुपये एकत्र करने होंगे। इसके बाद ही 100 करोड़ रुपये केंद्र को मिल सकेंगे। 
कीवर्ड income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,

  
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