कोयला कीमतें चढऩे से बिजली उत्पादकों की दिक्कत बढ़ी

अमृता पिल्लई |  Feb 11, 2018 09:51 PM IST

पिछले कुछ महीनों में वैश्विक रूप से कोयले की कीमतें चढ़ी हैं जिससे देश में ताप विद्युत उत्पादकों पर लागत दबाव बढ़ रहा है। इस वजह से घरेलू ताप विद्युत उत्पादकों को कम उठाव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।  आयातित कोयले पर निर्भर रहने वाले भारत में ताप विद्युत उत्पादकों को अब उत्पादन की ऊंची लागत से दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जबकि बिजली की बिक्री कीमत भारत में लगातार कमजोर बनी हुई है। अदाणी पावर, एस्सार पावर, टाटा पावर और जेएसडब्ल्यू एनर्जी ऐसी कुछ कंपनियां हैं जो आयातित कोयले के सहारे विद्युत परिचालन क्षमताएं संचालित करती हैं। एस्सार पावर के एक अधिकारी ने कहा, 'कोयले के लिए हमारी खरीद लागत पिछले तीन-चार महीनों में 55 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 60 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है।' 

 
इस लागत वृद्घि को देखते हुए अधिकारी ने कहा कि कोयले की कीमतों में प्रत्येक एक डॉलर की तेजी का मतलब है उत्पादित बिजली की लागत में 20-25 पैसे का अतिरिक्त बोझ पडऩा। एस्सार पावर के लिए, उसकी 2,400 मेगावॉट क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा आयातित कोयले के जरिये संचालित होता है। विद्युत उत्पादक पहले से ही दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में विश्लेषक तीसरी तिमाही में ऊंची कोयला लागत का व्यापक असर दिखने की आशंका जता रहे हैं। अदाणी पावर जैसी कंपनियों के लिए यह प्रभाव स्पष्टï है। कंपनी का समेकित शुद्घ नुकसान बढ़कर 12.9 अरब रुपये पर पहुंच गया जो एक साल पहले की समान तिमाही में 6.6 अरब रुपये पर था। कंपनी पर ऊंची ईंधन लागत, कम उत्पादन और अधिक ब्याज एवं मूल्यह्रïास लागत से भारी दबाव पड़ा है।
 
एक स्वतंत्र विश्लेषक ने पहचान नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, 'कीमतें बढ़ रही हैं और तीसरी तिमाही के आंकड़ों पर भी इसका निश्चित रूप से असर दिखेगा। हम मौजूदा समय में कीमतें नीचे आने की उम्मीद नहीं कर रहे हैं क्योंकि ऊर्जा कीमतें चढ़ रही हैं।'  भारत में बिजली उत्पादकों को कोल इङ्क्षडया से कोयले की किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है जिससे कंपनियां आयातित कोयले पर अपनी निर्भरता बढ़ाने के लिए बाध्य हो सकती हैं।  एसऐंडपी ग्लोबल प्लैट्ïस के एशिया थर्मल कोल में प्रबंध निदेशक दीपक कन्नन ने कहा, 'कोल इंडिया अपने मासिक उत्पादन लक्ष्य में लगातार विफल हो रही है। इसे देखते हुए भारतीय विद्युत संयंत्र अपनी मांग पूरी करने के लिए आयातित माल पर निर्भरता बढ़ा सकते हैं। हालांकि हमें कोयले की मौजूदा ऊंची कीमतों को देखते हुए समुद्री खेपों के लिए मांग में ज्यादा वृद्घि की संभावना नहीं दिख रही है। हमारा मानना है कि इकाइयां अब अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए घरेलू बाजारों पर अधिक ध्यान देंगी, लेकिन आयातित कीमतों में गिरावट की स्थिति में वे समुद्री खेपों पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं।'
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