खुदरा महंगाई दर अभी उच्च स्तर पर

इंदिवजल धस्माना और ईशान बख्शी | नई दिल्ली Feb 12, 2018 09:56 PM IST

दिसंबर में उच्च औद्योगिक उत्पादन और जनवरी में खुदरा मूल्य महंगाई दर में वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि दोनों में पहले के महीने के 17 माह के उच्चतम स्तर की तुलना में कमी आई है। पूंजीगत वस्तुओं और रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं के उत्पादन में दो अंकों की वृद्धि दर हुई है, लेकिन औद्योगिक उत्पादन सूचकांक दिसंबर में 7.4 प्रतिशत रहा, जो नवंबर में 8.8 प्रतिशत था। अनंतिम अनुमानों के मुताबिक नवंबर में वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत रही। बुनियादी ढांचा और निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि नवंबर मेंं 13.89 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई थी। 
 
विनिर्माण क्षेत्र से बल मिलने के कारण वृद्धि में तेजी बनी रही।  एक साल पहले नोटबंदी के प्रभाव के कारण इस दौरान वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत के निम्न स्तर पर रही थी।  वहींं दूसरी तरफ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर दिसंबर के 5.21 प्रतिशत की तुलना मेंं जनवरी में गिरकर 5.07 प्रतिशत रही, जो रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक ही है। इससे रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में यथास्थिति बरकरार रखने को बल मिला है।  इस माह के आखिर तक चालू वित्त की तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े आने के पहले यह आंकड़ा अहम है। इसके साथ ही द्वितीय अग्रमित आंकडा भी आएगा। महत्त्वपूर्ण आंकड़ों मेंं अब थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर और निर्यात के आंकड़े इस महीने जीडीपी के आंकड़ोंं के पहले आएंगे। वित्त वर्ष 2017-18 मेंं जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि वित्त वर्ष 17 में 7.1 प्रतिशत वृद्धि दर थी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, रिजर्व बैंक और आर्थिक समीक्षा के विभिन्न अनुमानों के मुताबिक  अंतिम आंकड़े आने पर वृद्धि दर थोड़ा ज्यादा 6.6 से 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। 
 
आंकड़ों से पता चलता है कि औद्योगिक प्रदर्शन और सकल नियत पूंजी सृजन, जिससे निवेश के संकेत मिलते हैं, तीसरी तिमाही में सुधर सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि आईआईपी वित्त वर्ष 18 की तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत बढ़ा है, जो वित्त वर्ष 18 की दूसरी तिमाही मेंं 3.3 प्रतिशत था। पहली तिमाही मेंं इसमें महज 1.9 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी। पहली दो तिमाही में खराब स्थिति के बाद  2017-18 में उद्योग में वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था, जो इसके पहले के साल में 5.6 प्रतिशत थी।  सकल नियत पूंजी सृजन चालू वित्त वर्ष में 4.5 प्रतिशत बढऩे की उम्मीद है, जो एक साल पहले 2.4 प्रतिशत था। 
 
केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि खासकर विनिर्माण सहित सभी क्षेत्रोंं में प्रदर्शन बेहतर रहा, जो शेष साल के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा, 'हालांकि  3.7 प्रतिशत की संचयी वृद्धि कम है, जिससे संकेत मिलता है कि अगर आगामी 3 महीने तक यही धारणा बरकरार रही तो पूरे साल के लिए वृद्धि 5 प्रतिशत रह सकती है।'
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