निवेश घटा सकता है ईपीएफओ

सोमेश झा | नई दिल्ली Feb 13, 2018 09:40 PM IST

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के पोर्टफोलियो प्रबंधकों ने बाजार में कॉरपोरेट बॉन्डों की अपर्याप्त आपूर्ति के संबंध में यह चिंता जताई है कि इससे ईपीएफओ अपने निवेश पैटर्न से भटक सकता है। ईपीएफओ ने एक विज्ञप्ति में कहा है, 'प्रदर्शन समीक्षा बैठकों के दौरान पोर्टफोलियो प्रबंधकों ने इसे लेकर चिंता जताई थी कि डेट और संबंधित योजनाओं में कॉरपोरेट निर्गम पर्याप्त नहीं हैं।' ईपीएफओ को अपनी सालाना आय का कम से कम 35 फीसदी और अधिकतम 45 फीसदी तक कॉरपोरेट बॉन्डों में निवेश करने की जरूरत है। पोर्टफोलियो प्रबंधकों ने ईपीएफओ को बताया है कि कॉरपोरेट बॉन्ड सेगमेंट में पेश की जा रही ब्याज दर या तो राज्यों के विकास से संबंधित ऋणों के समान है या उससे कम है। 
 
ईपीएफओ ने कहा है, 'पोर्टफोलियो प्रबंधकों की 2 फरवरी 2018 को हुई प्रदर्शन समीक्षा बैठक के दौरान पोर्टफोलियो प्रबंधकों ने उन गुणवत्तायुक्त बॉन्डों की अपर्याप्त आपूर्ति को लेकर फिर से चिंता जताई थी जिन्हें उचित प्रतिफल और परिपक्वता के साथ खरीदा जा सकता है।' पोर्टफोलियो प्रबंधकों ने ईपीएफओ को बताया कि चूंकि ईपीएफओ की कुल आय का कम से कम 35 प्रतिशत निवेश कॉरपोरेट बॉन्डों में करना अनिवार्य है, इसलिए वे निवेश पर प्रतिफल को अनुकूल बनाने में सक्षम नहीं हैं। भविष्य निधि संगठन ने कहा है, 'चूंकि चालू वित्त वर्ष के समाप्त होने में दो महीने से भी कम का समय बचा है और इस अवधि में निवेश लक्ष्य हासिल किया जाना है। इस स्थिति को देखते हुए पोर्टफोलियो प्रबंधकों ने चिंता जताई है कि निवेश पैटर्न का पालन करना उनके लिए काफी कठिन होगा।'
 
पिछले साल सितंबर में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने ईपीएफओ को सरकारी प्रतिभूतियों में 65 प्रतिशत तक निवेश करने की अनुमति दी थी, जो पूर्व की 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक थी। हालांकि पोर्टफोलियो प्रबंधकों का कहना है कि कॉरपोरेट बॉन्डों में निवेश बाद में नहीं घटा है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अब वित्त मंत्रालय से कहा है कि वह ईपीएफओ को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश की अपनी अधिकतम सीमा 65 प्रतिशत से बढ़ाने की अनुमति दे। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'हम सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लिए अधिकतम सीमा के नजदीक पहुंच गए हैं जिससे हमें लगभग 8 प्रतिशत की प्रतिफल दर मिली है। चूंकि सूचीबद्घ कंपनियों द्वारा जारी बॉन्डों की आपूर्ति सीमित है, इसलिए हमने निवेश पैटर्न में बदलाव करने को कहा है।' इस मुद्दे पर 21 फरवरी को श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार की अध्यक्षता में होने वाली ईपीएफओ के ट्रस्टी बोर्ड की बैठक में भी चर्चा की जाएगी। 
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