800 अरब रुपये के विनिवेश लक्ष्य पर सरकार की नजर

अरूप रॉयचौधरी | नई दिल्ली Feb 13, 2018 09:41 PM IST

केंद्र सरकार 2018-19 के लिए 800 अरब रुपये के अपने बजटीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए बड़ी तादाद में सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों और परिसंपत्तियों के निजीकरण या बिक्री की योजना बना रही है। एयर इंडिया के अलावा, पवन हंस, ड्रेजिंग कॉर्प, एचएलएल लाइफकेयर और इंडियन मेडिसिंस फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) में हिस्सेदारी बिक्री की दिशा में भी काम चल रहा है। पवन हंस में सरकार की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सरकार आगामी वित्त वर्ष में भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) के पांच होटलों से भी बाहर निकलने की योजना बना रही है और इसकी शुरुआत रांची तथा जयपुर से किए जाने की संभावना है। इनके अलावा, एनबीसीसी, ब्रिज ऐंड रूफ कंपनी को खरीद सकती है। 
 
निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने इन कंपनियों के संबंध में अपनी वेबसाइट पर कई अनुरोध प्रस्ताव जारी किए हैं। अधिकारी ने कहा, 'हम राज्य सरकारों के साथ आईटीडीसी होटलों की बिक्री पर भी चर्चा कर रहे हैं, क्योंकि वे उस भूमि के मालिक हैं जिस पर इन होटलों को बनाया गया।' विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए दीपम सार्वजनिक क्षेत्र के दो उद्यमों (भारत 22 समेत) के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) के अतिरिक्त खेप भी जारी करेगा। 2018-19 के लिए लक्ष्य 2017-18 के 1 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में कम था। सरकारी अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि इस वित्त वर्ष की दर्ज प्राप्त पूंजी 2015-16 ओर 2016-17 के संयुक्त आंकड़ों की तुलना में लगभग 110 अरब रुपये अधिक है।
 
कई आईपीओ लाए जाने की दिशा में भी काम चल रहा है। इनमें इंडियन रेलवेज कैटरिंग ऐंड टूरिज्म कॉरपोरेशन, रेल विकास निगम लिमिटेड, मझगांव डॉक्स, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड मिश्र धातु निगम लिमिटेड मुख्य रूप से शामलि हैं। अधिकारियों का कहना है कि ओएनजीसी और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के विलय के बाद ऐसे विलय एवं अधिग्रहण की रफ्तार में और तेजी आएगी। तीन सरकारी बीमा कंपनियों - ओरिएंटल, नैशनल और यूनाइटेड इंडिया के आईपीओ से इनका विलय किया जाएगा। 
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