तेल भंडारण में निजी क्षेत्र को मिल सकती है हिस्सेदारी

शाइन जैकब | नई दिल्ली Feb 19, 2018 12:49 PM IST

सलाहकार की जल्द नियुक्ति संभव

निजी रिफाइनरों को साझेदार बनाने के लिए कैबिनेट से लेनी होगी मंजूरी
विशाखापत्तनम, मंगलूरु और पदुर में रणनीतिक तेल भंडारण के हैं केंद्र
दूसरे चरण में ओडिशा के चांदीखोल और पदुर में बनाए जाएंगे केंद्र
नए केंद्र बनने के बाद कुल 76 दिन के लिए होगा भारत के लिए तेल का भंडार

सरकार भारत के निजी रिफाइनरों को  कच्चे तेल के भंडार के अगले चरण में साझेदार बनाने की योजना बना रही है। परियोजना की अनुमानित लागत 100 अरब रुपये होने की संभावना है, जो सार्वजनिक निजी हिस्सेदारी के माध्यम से लागू की जाएगी। संभव है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और एस्सार जैसे रिफाइनर सरकार से  हाथ मिलाकर रणनीतिक भंडारों को विकसित करें और उसका परिचालन करें।

इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि निजी रिफाइनरों को साझेदार बनाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक होगी।  इंडियन स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) के समक्ष पहले ही इनमें से कुछ कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, 'भंडारण की क्षमता से निजी कंपनियों को कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार चढ़ाव के जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। अगर जरूरत पड़ी तो निजी कंपनियों से कच्चे तेल की अदला बदली भी की  जा सकेगी।'

भारत के पास पहले ही विशाखापत्तनम, मंगलूरु और पदुर में भूमिगत चट्टानों की गुफाओं में रणनीतिक तेल भंडार है, जिनकी क्षमता क्रमश: 13.3 लाख टन, 15 लाख टन और 25 लाख टन है। इसका दूसरा दौर ओडिशा के चांदीखोल और पदुर के विस्तार के माध्यम से आने वाला है। दूसरे चरण के लिए राजस्थान के बीकानेर को भी चुना गया था, लेकिन बाद में रणनीतिक वजहों से पदुर स्थानांतरित कर दिया गया।

निजी साझेदारी लाने के लिए सरकार जल्द ही सलाहकार नियुक्त कर सकती है। निजी कारोबारियों को चुनने के लिए बोली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में मीडिया से कहा था, 'इस समय हमारे पास 66 दिन के तेल के भंडारण की सुविधा है। हमारे रणनीतिक भंडारण से इसमें 10 दिन और जुड़ जाएंगे।' रणनीतिक भंडारण के दूसरे चरण की कुल क्षमता 100 लाख टन होगी।

अबूधाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) मई तक मंगलूरु के भंडार केंद्र के लिए कच्चे तेल की खेप भेज रही है। भारत के साथ किए गए समझौते के मुताबिक एडीएनओसी 40-50 अरब रुपये का कच्चा तेल देगी। कंपनी बहुत बड़े कच्चे तेल कैरियर्स (वीएलसीसी) मंगलूरु भेजेगी, जो 7.5 लाख टन भंडारण को भरने के लिए होंगे।

एड़ीएनओसी मंगलूरु में दो कंपार्टमेंट में से एक भरेगी। एक अधिकारी ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां अन्य कंपार्टमेंट के लिए कच्चा तेल लाएंगी। इस समय भारत की कुल तेल शोधन क्षमता 24.76 करोड़ टन है, जो 2025 कर बढ़कर 41.435 करोड़ टन होने की उम्मीद है। इससे भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल खपत करने वाला देश बन जाएगा, जिसकी तेल की कुल जरूरतोंं मेंं से 80 प्रतिशत आयात होता है।

कीवर्ड तेल भंडारण, हिस्सेदारी, सलाहकार, नियुक्ति, रिफाइनर, साझेदार, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एस्सार,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक