जीएसटी से दाम पर असर नहीं, अनुपालन बढ़ा: केपीएमजी सर्वे

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Feb 23, 2018 10:14 PM IST

केपीएमजी के सर्वे में शामिल ज्यादातर लोगों का मानना है कि जीएसटी लागू होने के बाद कीमतें इसके पहले के दौर की तरह बनी रहीं। बहरहाल ऐसा मानने वालों की संख्या कम है कि जीएसटी के बाद कीमतें कम हुई है, जीएसटी के दौर में दाम बढ़े हैं, यह मानने वालों की संख्या ज्यादा है।  सलाहकार फर्म केपीएमजी के सर्वे में शामिल 43 प्रतिशत लोगों का मानना है कि जीएसटी लागू होने पर कीमतें यथावत बनी रहीं। 33 प्रतिशत का मानना है कि दाम बढ़े हैं। सिर्फ 24 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कीमतें घटी हैं। 
 
उम्मीद के मुताबिक बड़ी संख्या में 87 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि जीएसटी की वजह से अनुपालन बढ़ा है, जबकि 13 प्रतिशत अलग सोचते हैं। केपीएमजी के सर्वे में कंपनियों के 232 सीईओ, सह संस्थापक, सीटीओ शामिल हुए।  प्रतिक्रिया देने वाले 53 प्रतिशत लोगों को मुनाफारोधी प्रावधानों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं थी, सिर्फ 33 प्रतिशत लोग इस प्रावधान को जानते हैं। 70 प्रतिशत लोगों का कहना है कि सरकार ने मुनाफारोधी प्रावधानों को उद्योग की ओर से जीएसटी के पहले उपलब्ध कराए गए आंकड़ों की पूरी गणना करने के बाद लागू किया है, जबकि 36 प्रतिशत लोगों का कहना है कि प्रावधान चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रखा जाना चाहिए था, जहां बीटुसी आपूर्ति शामिल होती है।
 
सर्वे में शामिल 10 प्रतिशत लोगों का कहना है कि मुनाफारोधी प्रावधान कुल मिलाकर लागू नहीं किया जाना चाहिए था।  जीएसटी के तहत मुनाफा रोधी व्यवस्था 3 चरणों की प्रक्रिया है। राज्य स्तर की जांच समिति स्थानीय कंपनियों के लिए होती है और राष्ट्रीय स्तर की शिकायत के  लिए स्थायी समिति होती है। उसके बाद सुरक्षा महानिदेशालय की जांच होती है। इसके बाद निर्णय लेने वाला निकाय  राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण (नैशनल एंटी प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी) जांच करता है। मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण को अब तक 169 शिकायतें मिली हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आपूर्तिकर्ताओं ने वस्तु एवं सेवा कर का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिया है।
 
राजस्व विभाग की जांच शाखा सुरक्षा महानिदेशालय ने कुछ कंपनियों को नोटिस भेजा है।  जीएसटी के दौरान विभिन्न अंतिम तिथियोंं को लेकर प्रतिक्रिया देने वालोंं की राय करीब बराबर आई है। सर्वे में शामिल 51 प्रतिशत लोग इससे सहमत हैं, जबकि शेष 49 प्रतिशत ने अंतिम तिथियों को लेकर असंतोष जताया है। जीएसटी नेटवर्क पोर्टल को और ज्यादा प्रभावी बनाए जाने को लेकर प्रतिक्रिया देने वाले एकमत हैं। 95 प्रतिशत का कहना है कि इसे बेहतर बनाया जा सकता है, जबकि 5 प्रतिशत की राय है कि पोर्टल को अब और ज्यादा प्रभावी नहीं बनाया जा सकता है। 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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