नीति आयोग ने मोदीकेयर के लिए मांगा बजट अनुमान

साहिल मक्कड़ |  Feb 25, 2018 09:57 PM IST

व्यय वित्त समिति (ईएफसी) के समक्ष रखे गए एक प्रस्ताव में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) या मोदीकेयर की कुल लागत 250 अरब रुपये के करीब बैठेगी जिसमें 2018-19 और 2019-20 के लिए राज्यों द्वारा वहन की जाने वाली 100 अरब रुपये की राशि भी शामिल है।  हालांकि नीति आयोग ने कहा कि यह लागत पूर्वानुमान पर आधारित है। इस योजना को लाने के पीछे का दिमाग नीति आयोग का ही बताया जाता है। नीति आयोग ने 13 फरवरी के ईएफसी प्रस्ताव में कहा, 'योजना की कुल अनुमानित लागत 250 अरब रुपये निर्धारित की गई है। इसमें प्रति परिवार केंद्र सरकार की ओर से 650 रुपये और राज्य सरकारों की ओर से 432 रुपये के योगदान का पूर्वानुमान लगाया गया है। इसमें प्रशासनिक खर्च भी शामिल है। .कुल मिलाकर प्रति परिवार 1,082 रुपये का प्रीमियम बैठता है। चिकित्सा बीमा के क्षेत्र में मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक प्रीमियम की दर प्रति परिवार 500,000 रुपये के बीमा के लिए 5,000 रुपये या उससे अधिक है। इसलिए, मंत्रालय बाजार में उपलब्ध प्रीमियम की दर का आकलन करने और संभावित बीमा कंपनी पर विचार करने के बाद बीमा प्रीमियम का उचित अनुमान बताएगी।'  

 
फिलहाल, कई राज्य सरकारें 300,000 रुपये तक की बीमा के लिए प्रीमियम की ऊंची दर का भुगतान कर रहे हैं। उदाहरण के लिए राजस्थान सरकार 1 करोड़ परिवारों के लिए भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना चला रही है। यहां सरकार 300,000 रुपये की बीमा के लिए लगभग 1,250 रुपये प्रति परिवार का प्रीमियम दे रही है। केंद्र सरकार ने प्रति परिवार 500,000 रुपये तक का बीमा देने की घोषणा की है।   एक अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को ईएफसी से इस योजना के लिए मंजूरी लेनी होगी। इसकी वजह यह है कि 5 अरब रुपये से अधिक की बजटीय आवंटन वाली केंद्रीय योजनाओं के लिए ईएफसी की मंजूरी अनिवार्य होती है।
 
मोदीकेयर को लेकर सचिव (व्यय) की अध्यक्षता वाली ईएफसी की पहली बैठक गुरुवार को हुई थी जो कि बेनतीजा रही और अधिकारी अगले सप्ताह में फिर से बैठक कर सकते हैं।  नीति आयोग और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मोदीकेयर को लागू करने के विवरण को स्वीकृति के लिए ईएफसी से संपर्क किया था। इसमें कहा गया है कि सरकार 15 अगस्त से इस योजना को शुरू करने से पहले एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा परिषद (एनएचपीसी), राष्ट्रीय शासकीय बोर्ड (एनजीबी) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी (एनएचए) की स्थापना करेगी। एनएचपीसी की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री करेंगे और इसका उपाध्यक्ष नीति आयोग के उपाध्यक्ष का बनाया जाएगा। राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री इसमें सदस्य होंगे और एनजीबी के उपाध्यक्ष इसके सदस्य सचीव के तौर पर कार्य करेंगे। एनएचपीसी नीति संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
 
एनजीबी निर्णय लेने वाला तंत्र होगा। इसका अध्यक्ष नीति आयोग में सदस्य (स्वास्थ्य) को बनाया जाएगा और सचिव (स्वास्थ्य) को उपाध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। एनजीबी के सदस्यों में शामिल होंगे-नीति आयोग के सीईओ, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के सचिव, राज्यों के चार प्रधान सचिव, दो क्षेत्र विशेषज्ञ जिन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी (एनएचए) के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सीईओ द्वारा नामित किया जाएगा।  एनएचए, मोदीकेयर को लागू करने वाली एजेंसी होगी और इसका सीईओ अतिरिक्त सचिव या संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा। प्रस्ताव में यह अनुमान लगाया गया है कि एनएचए की स्थापना, बुनियादी ढ़ांचा तैयार करने, आईटी एवं दूसरे प्रशासनिक खर्च पर एक बार का खर्च आएगा जो कि 3 अरब रुपये के लगभग है।  
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