सेवा क्षेत्र के लिए 50 अरब रुपये का कोष

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Feb 28, 2018 09:44 PM IST

देश के प्रमुख 12 सेवा क्षेत्रों के टिकाऊ विकास को समर्थन देने के लिए सरकार ने आज 50 अरब रुपये के विशेष कोष के गठन की घोषणा की। इसके साथ ही सुधार की पहल से उन्हें ज्यादा प्रतिस्पर्धी और निर्यात केंद्रित बनाया जाएगा। सूचना तकनीक और आईटी इनेबल्ड सर्विसेज, पर्यटन और हॉस्पिटलिटी सेवाएं, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक सेवाएं के साथ अन्य को 12 विशेष उपक्षेत्र के रूप में चिहिन्नत करने और इन्हें 'चैंपियन सर्विसेज' के रूप में लेने का फैसला बुधवार को कैबिनेट की बैठक में किया गया। 
 
देश के जीडीपी में अहम भूमिका निभाने वाले निर्यात व नौकरियों के सृजन और सेवा क्षेत्र मेंं सुधार के आदेश प्रधानमंत्री कार्यालय ने दिए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय ने निजी हिस्सेदारों के साथ मिलकर इसके लिए क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार की।  वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट किया, 'एंबेडेड सेवाएं 'वस्तुओं' का अहम हिस्सा हैं। इस तरह से प्रतिस्पर्धी सेवा क्षेत्र विनिर्माण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता लाएगा।' उन्होंने कहा कि सेवाओं के कारोबार का अधिशेष भारत के वाणिज्यिक कारोबार में आधे से ज्यादा का वित्तपोषण करता है।
 
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने वैश्विक सेवा कारोबार में अपनी हिस्सेदारी 3.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.2 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सेवा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 45 प्रतिशत हिस्सेदारी सूचना तकनीक की है, जिसने 2016-17 में 143 अरब डॉलर राजस्व दिया, जबकि यह 2017-18 में यह 154 अरब डॉलर हो गया। उन्होंने कहा कि इसमें से 140 अरब डॉलर निर्यात और विदेशी कारोबार से है।  प्रसाद ने कहा कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 1 लाख करोड़ रुपये   करने की योजना है। प्रसाद ने कहा, 'हम संचार, सूचना तकनीक, डिजिटल सेवाओं और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में 50 से 75 लाख लोगों को नौकरियां देने जा रहे हैं।' उन्होंने कहा कि सरकार के भीम ऐप से जनवरी 2018 में रोजाना 50 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए। देश की कुल वृद्धि में सेवा क्षेत्र की वृद्धि अहम है। 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के वक्त भारत के सेवाओं के निर्यात में करीब एक दशक तक उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी। इस क्षेत्र की चक्रवृद्धि सालाना वृद्धि दर 1994-95 से 2004-05 के बीच 21.6 प्रतिशत रही। इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन के मुताबिक उसके बाद में 2005-06 से 2014-15 में यह गिरकर 11.9 प्रतिशत हो गई। 
 
2015 के बाद सरकार ने ट्रांसपोर्टेशन और बिजनेस सेवाओं को किनारे कर दिया और यह वृद्धि तालिका में पीछे रह गया। 2016-17 मेंं इस क्षेत्र की वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही। 2016-17 में सॉफ्टवेयर सर्विस का निर्यात, जो पूरी सेवाओं मेंं 45.2 प्रतिशत है, वैश्विक कारोबारी माहौल की चुनौतियों और परंपरागत सेवाओं पर कीमतों के दबाव के कारण 0.7 प्रतिशत गिर गया। वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि 2016-17 मेंं सेवा क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि कुल मिलाकर वृद्धि 6.6 प्रतिशत रही। निक्केई-आईएचएस मार्केट के पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स के मुताबिक तीन महीनों में जनवरी में इस सेक्टर में सबसे तेज बढ़ोतरी हुई, जिसकी प्रमुख वजह नए ऑर्डर में सुधार है। ऑर्डर दुरुस्त होने पर कंपनियों ने तेजी से भर्तियां की। जनवरी में सूचकांक में 51.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि दिसंबर में 50.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। 
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