घाटे का नया लक्ष्य भी मुश्किल

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Feb 28, 2018 09:45 PM IST

सरकार जनवरी मेंं ही 2017-18 के लिए राजकोषीय घाटे के बढ़े हुए पुनरीक्षित अनुमान के लक्ष्य से 13.7 प्रतिशत आगे निकल गई है। इसका आशय यह है कि सरकार को व्यय में भारी कटौती करनी पड़ेगी जिससे कि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य देश के सकल घरेलू उत्पाद का 3.5 प्रतिशत रखा जा सके। राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पहले 3.2 प्रतिशत था, जिसे बजट अनुमान में बढ़ाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया गया था।  सरकार ने बजट अनुमान के 5465.31 अरब रुपये की तुलना में पुनरीक्षित राजस्व घाटा 5948.49 अरब रुपये कर दिया था। अब यह लक्ष्य हासिल कर पाना भी कठिन लग रहा है, जब तक कि सरकार व्यय में कटौती नहीं करती। खासकर पूंजीगत व्यय घटाना होगा। अगर सरकार ऐसा करती है तो चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि को नुकसान हो सकता है। इस तरह से सरकार के लिए संतुलन बनाना कठिन हो गया है। 
 
अगर व्यापक आंकड़ोंं को देखेंं तो जनवरी में जीएसटी संग्रह अनुमान से कम रहने के बावजूद सरकार के राजस्व पर बहुत असर नहीं पड़ा है। अप्रैल जनवरी 2017-18 में पुनरीक्षित अनुमान की तुलना मेंं राजस्व 71.7 प्रतिशत था, जो 2016-17 की समान अवधि में 71.1 प्रतिशत था।  राजस्व में गैर कर्ज पूंजीगत प्राप्तियां, जिनमें विनिवेश और गैर कर राजस्व शामिल होता है और सरकार को स्पेक्ट्रम और रिजर्व बैंक की ओर से धन का स्थानांतरण शामिल है, 2017-18 में जनवरी तक सरकार की रफ्तार सुस्त कर दी है। रिजर्व बैंक का सरकार को स्थानांतरण पुनरीक्षित अनुमान पर निर्भर था, जबकि गैर कर राजस्व 52.7 प्रतिशत रहा, जो एक साल पहले 57.7 प्रतिशत था। 
 
गैर कर्ज पूंजीगत प्राप्तियां 2017-18 के अप्रैल जनवरी के दौरान बहुत कम 57.6 प्रतिशत रहीं, जो पिछले साल की समान अवधि में 77.9 प्रतिशत थी क्योंकि एचपीसीएल-ओएनजीसी का 369 अरब रुपये का का बड़ा लेन देन नहीं जोड़ा गया था।  जहां तक कर राजस्व का मसला है, जनवरी तक यह 9713.23 अरब रुपये रहा। यह आंकड़ा पुनरीक्षित अनुमान का 76 प्रतिशत है, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 75 प्रतिशत था।  जनवरी में जीएसटी का संग्रह गिरकर 863 अरब रुपये रह गया जो इसके पहले महीने के 867 अरब रुपये की तुलना में थोड़ा कम है। यह केंद्र व राज्यों के संयुक्त संग्रह के 910 करोड़ रुपये के लक्ष्य की तुलना में कम है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़े लगातार चौथे महीने 900 अरब रुपये से कम रहे हैं। नवंबर में कर संग्रह 808.08 अरब रुपये और अक्टूबर में 833 अरब रुपये था। 
 
इक्रा में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'सरकार की राजस्व प्राप्तियां वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में बढ़ रही हैं, लेकिन यह कर प्रवाह की सामान्य स्थिति है और वित्त वर्ष 2018 के अंतिम तिमाही में विनिवेश से आने वाला धन भी बढ़ा है। लेकिन लाभांष और मुनाफे का लक्ष्य संभवत: न हासिल किया जा सके।' 
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