जीडीपी में सुधार, सात के पार

दिलाशा सेठ और ईशान बख्शी | नई दिल्ली Mar 01, 2018 11:13 AM IST

आर्थिक वृद्घि

देश की आर्थिक वृद्घि दर वापस पटरी पर आती दिख रही है और अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में यह 7.2 फीसदी पर पहुंच गई, जो पांच तिमाही का उच्च स्तर है। विनिर्माण और निवेश गतिविधियों में तेजी से वृद्घि दर में सुधार हुआ है। तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्घि दर में उछाल से 2017-18 के अग्रिम अनुमान 6.5 फीसदी को मामूली बढ़ाकर 6.6 फीसदी किया गया है। हालांकि यह अब भी आर्थिक समीक्षा में लगाए गए 6.75 फीसदी के अनुमान से कम है। दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्घि दर को 6.3 फीसदी से संशोधित कर 6.5 फीसदी किया गया है। वित्त वर्ष 2016-17 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्घि दर 6.8 फीसदी थी।

हालांकि तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्घि दर के मामले में भारत ने तीन तिमाही के बाद चीन को फिर पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे तेजी से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था का तमगा बरकरार रखा है। दिसंबर तिमाही में चीन की वृद्घि दर 6.8 फीसदी रही। डीबीएस बैंक की अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, 'भारत ने वृद्घि दर के मामले में चीन सहित अन्य पड़ोसी देशों को पीछे छोड़ दिया। उत्पादन, निवेश और मांग में वृद्घि से विकास दर में तेजी  आई है।' सकल नियत पूंजी सृजन 12 फीसदी बढ़ा, जो पिछली कई तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। निवेश में सुधार से आने वाली तिमाहियों में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है।

इक्रा की प्रधान अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, 'पूंजीगत वस्तुओं में दो अंकों में वृद्घि, सरकार द्वारा पूंजीगत निवेश बढ़ाने और राज्य सरकारों द्वारा पूंजीगत व्यय बढऩे से तीसरी तिमाही में वृद्घि दर को बल मिला है।' उन्होंने कहा कि चूंकि नई निवेश परियोजनाओं और पूरी हो चुकी परियोजनाओं के मूल्य में वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में गिरावट आई है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि व्यापक तौर पर निवेश गतिविधियां पटरी पर लौटनी शुरू हो गई हैं।  

तीसरी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्घि दर 8.1 फीसदी रही जबकि दूसरी तिमाही में यह 6.9 फीसदी थी। इसका मतलब यह है कि कंपनियों ने खुद को जीएसटी के अनुकूल ढाल लिया है। अलबत्ता सीएसओ ने पहली तिमाही के लिए विनिर्माण क्षेत्र के  आंकड़ों को संशोधित कर घटा दिया है। इसमें 1.8 फीसदी की गिरावट आई है जो इस बात का संकेत है कि जीएसटी की तैयारियों के कारण कंपनियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। नायर ने कहा कि त्योहारी मौसम के बाद फिर से स्टॉक बढऩे, पहली छमाही की सपाट बढ़ोतरी के बाद मांग के फिर से जोर पकडऩे और कंपनियों की कमाई बढऩे से विनिर्माण जीवीए वृद्घि में वित्त वर्ष 2018 की तीसरी तिमाही में उल्लेखनीय सुधार आया। 

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