जीएसटी के तहत मुनाफाखोरी की शिकायत होगी आसान

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Mar 01, 2018 09:51 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कर कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं देने वाली कंपनियों के खिलाफ शिकायत दायर करने की प्रक्रिया अब और भी आसान होने जा रही है। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि सरकार मुनाफाखोरी-रोधी नियम के अंतर्गत शिकायत आवेदन को सरल बना सकती है, जिससे आम लोग विक्रेता के खिलाफ मुनाफाखोरी की शिकायत सुगमता से कर पाएंगे।  ऐसा इसलिए किया जाएगा क्योंकि अब तक इस व्यवस्था के तहत केवल 150 शिकायतें ही आई हैं। 6 राज्यों में इस बारे में शिकायत आई है जबकि दिल्ली, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश आदि राज्यों में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।    
 
मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण के चेयरमैन बीएन शर्मा ने स्थायी समिति से शिकायत आवेदन को सरलीकृत करने के बारे में सुझाव देने को कहा है। सरकार के अधिकारी ने कहा, 'आवेदन पत्र जल्द ही सरल रूप में उपलब्ध होगा। यहां तक कि पांचवीं कक्षा का छात्र भी आसानी से शिकायत कर सकेगा। अनिवार्य जानकारी वाले क्षेत्रों को छोटा किया जाएगा।' नए फॉर्म में शिकायतकर्ता को उत्पाद और विक्रेता का जीएसटी आइडेंटिफिकेशन नंबर देना होगा। अधिकारी ने कहा, 'इसकी जांच और मामला दर्ज करने का काम सरकार करेगी। इससे कोई भी आम आदमी शिकायत करने में सक्षम होगा।'
 
अभी फॉर्म में बिक्री मूल्य, कर (जीएसटी से पहले और उसके बाद), इनपुट क्रेडिट का लाभ आदि के बारे में जानकारी देनी होती थी। इसकी वजह से आम आदमी के लिए शिकायत दर्ज करना कठिन था। इसके अलावा, शिकायतकर्ता को कंपनी का जीएसटी आइडेंटिफिकेशन नंबर और उत्पाद के 6 अंकों वाला एचएसएन कोड जैसे विवरण भी देने होते हैं। इसके साथ ही जिस उत्पाद या सेवा पर मुनाफा-खोरी का आरोप लगाया गया हो, उसके बारे में अलग से आवेदन देना होता है, जिससे पूरी प्रक्रिया काफी जटिल हो जाती है।
 
राज्य छानबीन समिति को 23 शिकायतें मिली हैं जबकि केंद्र की स्थायी समिति को 63 शिकायतें मिली हैं। अभी तक आंध्र प्रदेश (5), हरियाणा (5), महाराष्ट्र (2), राजस्थान (4), उत्तर प्रदेश (6) और उत्तराखंड (1) से ही शिकायतें मिली हैं। अन्य राज्यों से कोई शिकायत नहीं आई है, जो फॉर्म के जटिल होने की वजह से हो सकती है। जीएसटी परिषद की 10 मार्च को होने वाली बैठक में मुनाफाखोरी शिकायत फॉर्म को सरल बनाने पर विचार किया जा सकता है। मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण की जांच इकाई सेफगार्ड महानिदेशालय ने पिरामिड इन्फ्राटेक, होंडा मोटर व्हीकल्स, लाइफस्टाइल इंटरनैशनल और हार्ड कैसल रेस्टोरेंट (मैकडॉनल्ड्स की फ्रैंचाइजी) को जीएसटी में कर कटौती का लाभ ग्राहकों को नहीं पहुंचाने के बारे में नोटिस भेजा है। 
 
महानिदेशालय ने इन फर्मों से अपनी बैलेंस शीट, पिछला शेष और पिछले एक साल के नफा-नुकसान के खाते मुहैया करने को कहा है। मुनाफाखोरी-रोधी प्र्रणाली में तीन-स्तरीय प्र्रावधान किए गए हैं - स्थानीय शिकायतों के लिए राज्य स्तरीय छानबीन समिति और राष्ट्रीय स्तर की शिकायतों के लिए स्थायी समिति और सेफगार्ड महानिदेशालय द्वारा जांच। ईवाई के बिपिन सपरा ने कहा, 'आवेदन प्रारूप को सरल बनाने से आम लोग आसानी से शिकायत कर सकेंगे। उद्योग को बेवजह परेशानी से बचाने के लिए सरकार के लिए जरूरी है कि वह जांच शुरू करने करने से पहले शिकायतों का प्रारंभिक सत्यापन करे।'
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