वित्त मंत्रालय ने रेटिंग एजेंसी फिच के सामने उठाया रेटिंग का मसला

भाषा |  Mar 07, 2018 10:38 PM IST

भारत ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय रेटिंग एजेंसी फिच के साथ बैठक में बुधवार को अपनी वित्तीय साख का स्तर ऊं चा किए जाने के पक्ष में तर्क देते हुए अर्थव्यवस्था में तेजी, राजकोषीय स्थिति की मजबूती तथा नई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में स्थिरता का हवाला दिया।

 

फिच जल्दी ही भारत की रेटिंग की सालाना समीक्षा रिपोर्ट जारी करने वाली है। उस से पहले हुई इस बैठक में फिच के निदेशक  (सॉवरिन रेटिंग्स) थॉमस रुकमाकर और अन्य अधिकारियों ने आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन तथा प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल से मुलाकात की।

बैठक के दौरान सरकार ने कहा कि वह राजकोषीय मजबूती की रूपरेखा पर आगे बढ़ेगी और2020-21 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3 प्रतिशत पर लाएगी। सूत्रों ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने फिच के अधिकारियों से कहा कि वह राजकोषीय मजबूती की राह पर अग्रसर है और देश इस साल राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत पर सीमित रखने में सफल रहा है। 

मंत्रालय के अधिकारियों ने फिच को यह भी बताया कि वे राजकोषीय मोर्चे पर किसी तरह की ढिलाई नहीं बरत सकते क्योंकि इससे मुद्रास्फीति प्रभावित होती है। हम राजकोषीय अनुशासन के हिसाब से ही आगे बढ़ेंगे। रूपरेखा के तहत अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को 3.3 प्रतिशत, 2019-20 में 3.1 प्रतिशत तथा 2020-21 तक  3 प्रतिशत पर लाने का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि रेटिंग एजेंसी ने जीएसटी तथा पंजाब नैशनल बैंक के घोटाले के बारे में भी पूछताछ की। इस पर मंत्रालय ने कहा कि ई- वे बिल शुरू होने के बाद बिलों का मिलान होने से अगले 7-8 माह में राजस्व संग्रह सुधरेगा।
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