जीएसटी क्षतिपूर्ति हेतु 59,000 करोड़

भाषा | नई दिल्ली Mar 08, 2018 10:59 PM IST

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के बाद राज्यों को हुई राजस्व क्षतिपूर्ति के लिए 59,000 करोड़ रुपये की राशि राज्यों को हस्तांतरित करने का फैसला किया है। इसके अलावा केंद्रीय बिक्री कर यानी सीएसटी की मद में भी राज्यों को 1,384.59 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की जाएगी।

 

संसद में आज पेश वर्ष 2017- 18 की पूरक अनुदान मांगों के चौथे बैच में इसके लिए अतिरिक्त व्यय की मंजूरी मांगी गई है। वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चालू वित्त वर्ष की अनुपूरक अनुदान मांगों की चौथी किस्त को आज लोकसभा में पेश किया। इसमें कुल मिलाकर 9,06,835.77 करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय को अधिकृत करने के लिए संसद की मंजूरी मांगी गई है। इस राशि में से निवल नकद खर्च 85,315.30 करोड़ रुपये का ही होगा। इस राशि में 59,000 करोड़ रुपये राज्यों को जीएसटी के कारण हुई राजस्व हानि की भरपाई की व्यवस्था के तहत तथा 1,384.59 करोड़ रुपये की राशि सीएसटी की मद में भी राज्यों को क्षतिपूर्तिके रूप में की जाएगी। 

शेष 8,21,519.19 करोड़ रुपये की राशि की पूर्ति विभिन्न मंत्रालयों, विभागों के बजट आवंटन में हुई बचत अथवा अधिक प्राप्ति के जरिए पूरी की जाएगी। पूरक अनुदान मांगों के इस चौथी बैच में कुल मिलाकर विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से जुड़ी 72 अनुदान मांगे और दो विनियोग शामिल हैं। प्रमुख अनुदान मांगों में वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग से जुड़ी जीएसटी लागू होने पर राज्यों को राजस्व हानि की भरपाई के लिए 58,999.99 करोड़ रुपये की राशि जारी करने, राज्य सरकारों को सीएसटी मद में हुई क्षतिपूर्ति की भरपाई के लिए 1,384.59 करोड़ रुपये की मांग के लिए है। इसके साथ ही जीएसटी क्षतिपूर्ति राशि को जीएसटी क्षतिपूर्ति कोष में भी स्थानांतरित किया जाएगा। कुल मिलाकर इस मद में 61,215.58 करोड़ रुपये के अतिरिक्त व्यय की मंजूरी मांगी गई है।


अनुदान मांगों की इस नवीनतम बैच में 9,06,835.77 करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय में 6,94,966.17 करोड़ रुपये की राजकोषीय हुंडियों, स्विचिंग, अर्थेपाय अग्रिम और अंतरराष्ट्रीय वित्त संस्थाओं को जारी प्रतिभूतियों की अतिरिक्त आवश्यकता को पूरा करने हेतू मांगे गए हैं। हालांकि, यह राशि विनियोजन में से ही उपलब्ध बचतों के जरिए पूरी कर ली जाएगी, इसके लिए अलग से कोई नकद व्यय नहीं होगा।  अन्य प्रमुख अनुदान मांगों में 7,832 करोड़ रुपये राष्ट्रीय निवेश निधि में अंतरण के लिए व्यय पूरा करने हेतु मांगे गए हैं। यह सांकेतिक पूरक अनुदान के रूप में होगा। 

9,260 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि की मंजूरी रक्षा मंत्रालय के पेंशन संबंधी प्रभारों के अतिरिक्त व्यय को पूरा करने के लिए मांगी गई है। इसके अलावा कुछ अन्य मंत्रालयों के विभिन्न कार्यक्रमों की पूर्ति हेतू भी अतिरिक्त अनुदान की मंजूरी मांगी गई है लेकिन इन सभी मांगों को विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के बचे धन  से ही पूरा किया जाएगा।
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