डिजिटल अर्थव्यवस्था की राह में तमाम रोड़े

किरण राठी | नई दिल्ली Mar 08, 2018 11:04 PM IST

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने आने वाले 5 से 7 साल में भारत को 1 लाख करोड़ डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह आसान नहीं होगा। खासकर नए दौर की तकनीक और उभरते डिजिटल माहौल के मुताबिक लाभदायक कारोबारी मॉडल अभी विकसित किया जाना बाकी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक 1 लाख करोड़ डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था का लक्ष्य निश्चित नहीं है और सरकार को इसके लिए सही नीतियां बनानी होंगी। साथ ही अगर वह इस लक्ष्य को हासिल करना चाहती है तो उन नीतियोंं को उचित तरीके से लागू करना होगा।  इस तरह की प्रतिबद्धता और इसे तेजी से लागू करने की कार्रवाई के अभाव में भारत में डिजिटल कारोबार का आर्थिक मूल्य अगले 5 से 7 साल में 50 से 60 करोड़ डॉलर तक ही पहुंच सकता है।

भारत का डिजिटल और आईटी उद्योग मौजूदा स्वरूप में प्राथमिक रूप से आईटी और आईटी सक्षम सेवाओं द्वारा संचालित है और यह अनुमानत: 15 अरब डॉलर का है। इसके बाद वित्तीय सेवाएं 50 अरब डॉलर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 40 अरब डॉलर का है। बहरहाल अगर आगे देखें तो मुख्य ध्यान स्टार्टअप, वित्तीय तकनीक और नए दौर की तकनीक जैसे कृ त्रिम इंटेलिजेंस (एआई) इंटरनेट आफ थिंग्स (आईओटी), डिजिटल भुगतान, डिजिटल शिक्षा और ई हेल्थकेयर पर होगा। 

लेकिन डिजिटल सेक्टर पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि इस मामले में देश अभी  ई-शिक्षा, ई-स्वास्थ्य, डिजिटल वित्तीय सेवाएं या साइबर सुरक्षा जैसे डिजिटल थीम पर लाभदायक कारोबार मॉडल विकसित करने के शुरुआती दौर में है। इसके अलावा इस तरह के डिजिटल माहौल के लिए कोई नियामकीय वातावरण नहीं है। एक विशेषज्ञ ने कहा, 'सरकार को निजी क्षेत्र के साथ एक मिला जुला कारोबारी मॉडल विकसित करने की जरूरत है, जिससे निवेश आ सके और ऐसे क्षेत्रों मेंं नवोन्मेष हो सके।'

सरकार को चुनौतियों के बारे में जानकारी है और वह निजी क्षेत्र के साथ सहयोग कर रही है, जिससे कि इसकी जरूरतों को समझा जा सके और यह साफ हो सके कि किस तरह के नीतिगत समर्थन की जरूरत है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस सिलसिले में आईटी दिग्गजों के साथ कुछ बैठकें की है। मंत्रालय ने देश में डिजिटल सेवाओं के प्रसार का खाका तैयार करने के लिए मैकिंजी ऐंड कंपनी से भी संपर्क साधा है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि मैकिंजी ने मंत्रालय को पहले ही रिपोर्ट सौंप दी है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है। सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग भी राज्य सरकारों के साथ मिलकर डिजिटल सेवाओं की तैयारियों का मूल्यांकन करेगा। 

सरकार ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के मुख्य कारकों के रूप में मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, 100 स्मार्ट सिटी, 50 मेट्रो परियोजनाओं और स्वच्छ भारत को चुना है। सरकार ने यह भी अनुमान लगाया है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था से 3 करोड़ नौकरियों का सृजन 2024-25 तक होगा, जो मौजूदा स्तर का दोगुना है।
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