मोदीकेयर : 1100 बीमारियां होंगी कवर

साहिल मक्कड़ | नई दिल्ली Mar 08, 2018 10:34 PM IST

राज्यों के साथ फिर होगा सलाह-मशविरा

► योजना के 15 अगस्त से शुरू होने की उम्मीद
राज्यों की योजना से जोडऩा है बड़ी चुनौती
प्रायोगिक स्तर पर शुरू नहीं होगी योजना

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) के तहत दिए जाने वाले करीब 1,100 बीमारियों को स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जा रहा है।  इस योजना के 15 अगस्त को शुरू होने की उम्मीद है। अलबत्ता राज्य सरकारें अब भी इसे लागू करने के मॉडल, लागत और लाभार्थियों को लेकर विचार विमर्श कर रही हैं।

मोदी सरकार की इस महत्त्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन की तैयारियों को देख रहे एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम राज्यों के साथ एक बार फिर सलाह मशविरा करेंगे क्योंकि वे अब भी स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। दूसरे दौर की बातचीत में हम इसकी रूपरेखा और क्रियान्वयन के विभिन्न मॉडलों को अंतिम रूप देंगे। राज्य इन मॉडलों को अपना सकते हैं।' पिछले महीने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और नीति आयोग ने राज्यों के वित्त सचिवों को एनएचपीएस के बारे में जानकारी दी थी। आम बजट में इस योजना की घोषणा की गई थी। इसके तहत सरकार करीब 40 फीसदी आबादी को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा देगी। केंद्र इसमें 60 फीसदी राशि वहन करेगा जबकि बाकी राशि राज्य को देनी होगी।

मोदी ने इसी सप्ताह इस योजना की प्रगति की समीक्षा की थी और अधिकारियों से इसके क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा था। अमूमन किसी भी बड़ी योजना को पहले प्रयोग के तौर पर लागू किया जाता है लेकिन एनएचपीएस में ऐसा नहीं किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा, 'हमें इसी तरह की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को चलाने का अनुभव है। इसलिए इसे प्रयोग के तौर पर चलाने की जरूरत नहीं होगी।'

अलबत्ता इस योजना की सफलता राज्यों पर निर्भर करेगी जिनके लिए अपनी मौजूदा स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को एनएचपीएस के साथ जोडऩा मुश्किल हो रहा हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दोनों योजनाओं के लाभार्थी अलग-अलग होंगे। केंद्र की योजना सामाजिक आर्थिक जातिवार जनगणना पर आधारित है जिसमें 7 वंचित श्रेणियों में गरीबों की पहचान की गई है। राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में वंचित श्रेणियों में शामिल लोगों के अलावा दूसरे लोगों को भी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ दिया गया है। कर्नाटक सरकार ने हाल में घोषणा की है कि वह उसकी स्वास्थ्य योजना में राज्य के सभी निवासी आएंगे जबकि पश्चिम बंगाल ने एनएचपीएस को लागू नहीं करने का फैसला किया है।

अधिकारी ने कहा, 'सबसे बड़ी चुनौती केंद्र और राज्य की योजनाओं को जोडऩे की है। जनगणना के आंकड़े आधार से नहीं जोड़े गए हैं, इसलिए बड़ी संख्या में नाम इधर-उधर हो सकते हैं और लागत भी बढ़ सकती है। इसलिए जब तक जनगणना के आंकड़े आधार से नहीं जोड़े जाते हैं तब तक राज्यों को अपनी मौजूदा योजनाओं का विस्तार करने की सहूलियत दी जाएगी। राज्यों को दो अलग-अलग कार्ड जारी करने का भी विकल्प दिया जा रहा है।'
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