महिलाओं के समूहों के कर्ज की चूक में गिरावट

संजीव मुखर्जी | नई दिल्ली Mar 11, 2018 11:04 PM IST

ऐसे समय में जब बैंकिंग क्षेत्र खराब कर्ज की समस्या से जूझ रहा है, आधिकारिक आंकड़ों से एक क्षेत्र में राहत नजर आ रही है। छोटे पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां चलाने वाले और महिलाओं के नेतृत्व वाले असंगठित स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) कर्ज चुकाने के मामले में बेहतर साबित हुए हैं। 

 

जनवरी 2018 तक महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह को दिए गए कुल कर्ज का 2.5 प्रतिशत गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) था। 2013 के आसपास राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत बैंक से जुडऩे के पहले इस कर्ज का एनपीए 26 प्रतिशत के करीब था। 
अगर एनआरएलएम अवधि के पहले और बाद को इकट्ठे देखा जाए तो जनवरी 2018 तक कुल दिए गए कर्ज का 6.76 प्रतिशत एनपीए था, जिसे बैंकिंग मानकों पर खराब माना जाता है। बहरहाल एनआरएलएम के हिस्सा के रूप में लिंकेज के बाद बदलाव को ध्यान दिए जाने की जरूरत है। अनंतिम आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी 2018 तक इस तरह के एसएचजी का बकाया 511 अरब रुपये था, जिसमें से करीब 13 अरब रुपये (2.55 प्रतिशत) को एनपीए के रूप मे वर्गीकृत किया गया है। 

रिजर्व बैंक की दिसंबर 2017 की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का सकल एनपीए मार्च तक बढ़कर 10.8 प्रतिशत होने और सितंबर 2018 तक 11.1 प्रतिशत होने की संभावना है। अध्ययनों से पता चलता है कि औसतन भारत का कुल कर्ज में एनपीए का अनुपात पिछले 5 साल में तेजी से बढ़ा है, जो 2016 मेंं बढ़कर 9 प्रतिशत के करीब हो गया। अगर हम चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसी अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से तुलना करें तो इन देशों में कुल कर्ज का एनपीए 4 प्रतिशत से नीचे है। इस स्तर को सामान्यतया सुरक्षित माना जाता है। 

ऐसा नहीं है कि जिन एसएचजी को एनआरएलएम के तहत बैंक लिंकेज के हिस्सा के रूप में कर्ज दिया जाता है उनकी वित्तीय स्थिति हमेशा मजबूत रहती है। एनआरएलएम के तहत लिंकेज के ढांचागत प्रारूप के पहले कुल कर्ज का 26 प्रतिशत एनपीए था। कुछ राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों जैसे राजस्थान, पुदुच्चेरी, लक्ष्यदीप में कुल बकाये में एनपीए का प्रतिशत 70 से 90 प्रतिशत तक था। 
आंकड़ों से पता चलता है कि एनआरएलएम में बदलाव के बाद क्षेत्रीय आधार पर एनपीए में बहुत उतार चढ़ाव है, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों को दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में एनपीए राष्ट्रीय औसत की तुलना में ज्यादा है। 

2013-14 में 10.1 लाख एसएचजी को 240 अरब रुपये कर्ज दिया गया था। जनवरी 2018 तक यह कर्ज बढ़कर  310 अरब रुपये हो गया और एसएचजी की संख्या बढ़कर 19.8 लाख हो गई है। 
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि गरीब और हाशिये पर खड़ी महिलाओं के समूह को दिए गए बैंक कर्ज के मामले में हमारा अनुभव बेहतर रहा है और उनकी विश्वसनीयता व समय पर भुगतान करने की स्थिति में पिछले कुछ वर्षों से लगातार सुधार हो रहा है। 

आंकड़ों से पता चलता है कि 2011 से महिला सदस्यों के एसएचजी का बैंक कर्ज एनआरएलएम के तहत 1.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है। करीब 35 लाख एसएचजी को इस कार्यक्रम का लाभ मिला है।
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