भारत की बैंकिंग व्यवस्था में ब्लॉकचेन

वीरेश्वर तोमर | नई दिल्ली Mar 11, 2018 11:34 PM IST

ब्लॉकचेन

बैंकिंग क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे धोखाधड़ी के मामलों ने सरकार तथा वित्तीय क्षेत्र के दिग्गजों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पंजाब नैशनल बैंक में 127 अरब रुपये की धोखाधड़ी की गुत्थियां अभी सुलझनी शुरू ही हुईं थीं कि ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) में 390 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला भी सामने आ गया। 4 मार्च को देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक में 3.29 करोड़ रुपये के लोन के गलत प्रयोग का मामला भी सामने आया है। इन सब मामलों और बैंकों के बढ़ते एनपीए के बीच वैश्विक गलियारों में नई तकनीक ब्लॉकचेन की चर्चा हो रही है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2018-19 के भाषण के दौरान कहा कि सरकार आभासी मुद्रा (क्रिप्टो एसेट्स) को कानूनी मान्यता नहीं दे रही, लेकिन डिजिटल भारत को एक कदम आगे ले जाने के उद्देश्य से इस क्षेत्र में ब्लॉकचेन तकनीक की संभावनाएं तलाशने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा। हालंकि बैंकिंग क्षेत्र में ब्लॉकचेन के उपयोग की संभावनाओं से पहले बैंक धोखाधड़ी और ब्लॉकचेन की कार्यप्रणाली को समझना होगा।

बैंक धोखाधड़ी के कारण

अधिकांश बैंकों में धोखाधड़ी के लिए बैंकिंग व्यवस्था की कमजोर कडिय़ों का फायदा उठाया जाता है। बैंकिंग व्यवस्था के जानकार या कभी कभी बैंक के अपने कर्मचारी इसमें शामिल होते हैं। पंजाब नैशनल बैंक मामले में पूर्व बैंक मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी ने नीरव मोदी को स्विफ्ट सिस्टम के तहत एक मांग पत्र (एलओयू) जारी किया, लेकिन बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में इसे दर्ज नहीं किया। बैंक की लेखा परीक्षण व्यवस्था 7 वर्ष तक इस गतिविधि को सामने नहीं ला सकी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पंजीकृत गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) फिनवे कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी रचित चावला इसे सीधे तौर पर निगरीनी प्रक्रिया की चूक मानते हैं। रचित कहते हैं, 'नीरव मोदी द्वारा पंजाब नैशनल बैंक में किया गया घोटाला कमजोर निगरानी तंत्र और लेखा परीक्षण की विफलता का परिणाम है।' इसी तरह भारतीय स्टेट बैंक ने बताया कि एक कर्ज सलाहकार डी. चित्रा ने पहले बैंक अधिकारियों को अपने विश्वास में लिया और बैंक से 3.29 करोड़ रुपये का कर्ज लेने के लिए गलत दस्तावेज और भ्रामक जानकारियां दीं।

क्या है ब्लॉकचेन

ब्लॉकचेन एक विकेंद्रीकृत तकनीक है, जिसमें आंकड़ों के ब्लॉक की एक श्रंखला होती है। प्रत्येक ब्लॉक में उस समय हुए लेनदेन का लेखा जोखा होता है, यह पूरी तरह से सार्वजनिक होती है और ब्लॉकचेन का प्रयोग करने वाला कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इस तकनीक में माइनर की बड़ी भूमिका होती है। प्रत्येक लेनदेन के सफल होने से पहले उसे माइिनंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें लेनदेन की वैधता की जांच होती है। हालांकि वर्तमान में इसका एक और प्रारूप सामने आ रहा है, जहां इसे पूरी तरह से सार्वजनिक करने के बजाए इसकी पहुंच एक निर्धारित समूह तक सीमित रहती है।

ब्लॉकचेन तकनीक में सभी ब्लॉक एक दूसरे से जुड़े होते हैं और किसी विशेष ब्लॉक में बदलाव के लिए लाखों-अरब गणनाएं करनी होंगी। इसलिए एक बार आंकड़े दर्ज हो जाने के बाद इसमें बदलाव करना लगभग नामुमिकन होता है, क्योंकि किसी भी एक ब्लॉक में मामूली बदलाव करते ही दूसरे सभी ब्लॉक परस्पर जुड़े होने के कारण इस बदलाव से असहमति जता देते हैं। यही जटिल क्रिप्टोग्राफी तकनीक इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है

ब्लॉकचेन का अनुप्रयोग

क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है, लेकिन ब्लॉकचेन केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका उपयोग बैंकिंग व्यवस्था, कानून, स्वास्थ्य, जमीन से जुड़े कागजात, डिजिटल मतदान आदि विभिन्न क्षेत्रों में हो सकता है। साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं कि ब्लॉकचेन बैंकिंग व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है। वह कहते हैं, 'ब्लॉकचेन हमारी बैंकिंग व्यवस्था के लिए एक गेम चेंजर तकनीक साबित हो सकती है। एक सर्वे के अनुसार विश्व के 70 प्रतिशत से अधिक बैंक अपनी व्यवस्था में ब्लॉकचेन के अनुप्रयोग की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं।'

जटिल क्रिप्टोग्राफी तकनीक, पारदर्शी तथा सभी के लिए उपलब्धता (सार्वजनिक) जैसी विशेषताओं के कारण ब्लॉकचेन तेजी से अपनायी जाने वाली तकनीक बनती जा रही है। हालांकि इसका एक और रूप प्रचिलत है, जिसमें ब्लॉकचेन पूरी तरह सार्वजनिक ना होकर एक निर्धारित समूह तक (अनुमति प्राप्त ब्लॉकचेन) इसकी पहुंच सीमित रहती है। वर्तमान बैंकिंग व्यवस्था में इन दोनों तरह की ब्लॉकचेन का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इनके स्वरूप अलग अलग होंगें।

सार्वजनिक ब्लॉकचेन व्यवस्था में प्रत्येक ब्लॉक की वैधता के लिए कोई भी व्यक्ति माइनर की तरह जुड़ सकता है, जिसके बदले उसे एक प्रोत्साहन राशि मिलती है। उदाहरण के लिए बिटकॉइन ब्लॉकचेन के लिए में माइनर को प्रोत्साहन राशि के तौर पर बिटकॉइन का एक हिस्सा मिलता है। यदि इस व्यवस्था को भारतीय बैंकिंग में लाया जाता है तो सभी माइनर को एक प्रोत्साहन राशि देनी होगी, क्योंकि माइनिंग प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में बिजली और कंप्यूटर क्षमता खर्च होती है। ऐसे में हमें या तो एक नई किरप्टोकरेंसी बनानी होगी अथवा किसी दूसरे रूप में प्रोत्साहन राशि देनी होगी। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण के बाद इसकी संभावना काफी कम है कि भारत अपनी आभासी मुद्रा जारी करेगा। हालांकि इस प्रणाली से दैनिक वित्तीय लेनदेन में भी ब्लॉकचेन को प्रयोग को संभव बनाया जा सकता है।

जानकारियों पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से भारतीय बैंकिंग व्यवस्था में अनुमति प्राप्त (परमिशन्ड) ब्लॉकचेन का प्रयोग भी संभव है। हालांकि इसमें ब्लॉकचेन की एक खास विशेषता से समझौता करना पड़ेगा, फिर भी जटिल क्रिप्टोग्राफी की सुरक्षा और पारदर्शिता इसे वर्तमान तकनीक से एक कदम आगे रखेंगी। इसमें सभी बैंकों को एक ब्लॉकचेन से जोडा जा सकता है, जो एलओयू जैसे दस्तावेजों या दूसरे लेनदेन की वैधता की जांच करेंगे। एक बार दर्ज हो जाने के बाद इसके आंकड़ों में बदलाव लगभग असंभव है।

भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और पद का दुरुपयोग करने वाले व्यक्ति को भरोसा होता है कि उसकी शिनाख्त या तो हो ही नहीं पाएगी या इसमें बहुत अधिक समय लग जाएगा। केवल पारदर्शिता से भी भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है, लेकिन ब्लॉकचेन तकनीक उस स्थिति को संभव बना सकती है, जहां इस तरह के काम हो ही ना सके। पवन दुग्गल कहते हैं कि भारत को बहुत तेजी से इस तकनीक पर काम करना चाहिए। वह कहते हैं, 'भारत की कई नीतियां भविष्योन्नमुखी नहीं हैं और हमें जल्द से जल्द इस पर स्पष्टता लानी होगी। हालांकि आंध्रप्रदेश ने कहा है कि वह 2019 तक भूमि लेनदेन के रिकॉर्ड ब्लॉकचेन पर ले आएगा, लेकिन केंद्र को भी इस दिशा में तेज कदम बढ़ाने होंगे।'

समस्याएं

वतर्मान बैंकिंग व्यवस्था में अतिगोपनीयता, कामकाज का तरीका और देश में तकनीक एवं इंटरनेट की स्थिति एक बड़ी बाधा बन सकती है। रचित चावला कहते हैं कि बैंकिंग व्यवस्था में विभिन्न सॉफ्टवेयर का प्रयोग होता है और हो सकता है कि ब्लॉकचेन तकनीक इन सॉफ्टवेयर के साथ सुसंगत ना हो। वह आगे कहते हैं, 'भारतीय बैंक, विशेषकर सरकारी बैंक के अधिकांश कर्मचारी तकनीक कुशल नहीं हैं और इस जटिल तकनीक के साथ काम करने में उन्हें समस्या आ सकती है।'

पवन दुग्गल बैंकों की वर्तमान कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। वह कहते हैं कि जटिल आंतरिक व्यवस्था के कारण ही इतने अधिक घोटाले संभव हुए हैं। वह कहते हैं, 'हम ब्लॉकचेन तकनीक के द्वारा होने वाले साइबर अपराधों की संभावनाओं और रोकथाम के लिए आवश्यक कानूनों पर शोध कर रहे हैं, लेकिन हम इसे लेकर काफी आश्वस्त हैं। यह बैंकों के वजूद की लड़ाई है और उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाना होगा।'

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