किसानों के आगे झुकी सरकार

सुशील मिश्र | मुंबई Mar 12, 2018 10:21 PM IST

किसान आंदोलन

कृषि उपयोग में लाई जाने वाली वन भूमि आदिवासियों और किसानों को सौंपने के लिए बनेगी समिति
6 महीने के अंदर इस पर निर्णय लेने का दिया भरोसा
ऋण माफी, स्वामीनाथन समिति की अनुशंसा को लागू करने पर अभी नहीं हुआ निर्णय

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की मांग मानने का लिखित आश्वासन दिया है। कर्ज माफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर नाशिक से मुंबई पहुंचे किसानों और मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के बीच करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद सरकार ने किसानों की बात मानने की बात कही। फडणवीस ने कहा कि सरकार ने किसानों की ज्यादातर मांगें मान ली हैं और उन्हे पत्र सौंप दिया है।

किसानों को आंदोलन खत्म करने के लिए मनाने की जिम्मेदारी सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन को दी गई है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ हमारी सकारात्मक बैठक हुई है। उनकी 12-13 मांगें हैं जिनमें से कुछ को स्वीकार कर लिया गया है। वे सरकार के फैसले से संतुष्ट हैं। उन्हें लिखित मसौदा दिया गया है। आदिवासी विकास एवं जनकल्याण मंत्री बी सावरा ने बताया कि किसानों की मांग है कि वे जितनी जमीन पर खेती कर रहे हैं, वह उनके नाम होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह मांग मान ली है। मुख्य सचिव इस मामले को देखेंगे और 6 महीने के अंदर इसे लागू किया जाएगा। 

हालांकि खबर लिखे जाने तक किसानों की तरफ से बयान नहीं मिल सका। किसानों के प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक सूत्र ने कहा कि सरकार से हुई बातचीत को सदस्यों के बीच रखा जाएगा और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। सरकार के लिखित आश्वासन के बाद बात बनेगी, इसमें संदेह है क्योंकि बैठक में जाने के पहले किसान नेता अजित नवले ने कहा कि एक भी मांग नहीं मानी तो किसान आजाद मैदान में ही आमरण अनशन कर देंगे। सरकार और किसानों की बात से एक बात तो स्पष्ट है कि किसानों की पूरी बात नहीं मानी गई है। 

इससे पहले सिर पर लाल टोपी और हाथों में लाल झंडे थामे किसानों के हूजुम ने मुंबई के आजाद मैदान को लाल सागर में तब्दील कर दिया। अन्नदाता की दशा और शांतिपूर्ण मार्च ने हर दिल को पिघला दिया। विपक्षी दलों के साथ मुंबईवासी भी किसानों के साथ हमदर्दी के साथ खड़े हो गए। सरकार भी पूरी तरह से किसानों के आगे नतमस्तक होकर उनको मनाने में जुट गई।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया कि किसानों का विशाल मार्च जनशक्ति का परिचायक है। कांग्रेस केंद्र और राज्य सरकारों की बेरुखी के खिलाफ किसानों एवं आदिवासियों के साथ है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से अहंकार छोडऩे और किसानों की मांग पूरी करने की अपील की। मनसे  अध्यक्ष राज ठाकरे सुबह किसानों के बीच पहुंचे तो शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे उनके मार्च में शामिल हुए। राकांपा सुप्रीमो शरद पवार ने सरकार को किसानों की बात सुनने की नसीहत दी। 
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