वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री बढ़ी, बेहतर परिदृश्य संभव

ईशान बख्शी और टीई नरसिम्हन | नई दिल्ली/चेन्नई Mar 12, 2018 10:36 PM IST

वाणिज्यिक वाहन विनिर्माताओं का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार, बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च और ओवरलोडिंग मानदंडों के सख्त कार्यान्वयन से बिक्री बढ़ी है। पिछले कई वर्षों की कमजोर वृद्धि के बाद हाल के महीनों में इन वाहनों की बिक्री में लगातार तेजी दिख रही है। वित्त वर्ष 2017-18 की दिसंबर तिमाही में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 33.6 फीसदी की वृद्धि हुई जबकि सितंबर तिमाही में यह आंकड़ा 21 फीसदी रहा था। केवल जनवरी में ही इस श्रेणी में दमदार 39.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

 

हल्के वाणिज्यिक वाहन और मझोले एवं भारी वाणिज्यिक वाहन दोनों श्रेणियों की बिक्री में दमदार वृद्धि दर्ज की गई है। दिसंबर तिमाही में मझोले एवं भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई जो सितंबर तिमाही की 20 फीसदी की वृद्धि के मुकालबे अधिक है। जनवरी में इस श्रेणी की बिक्री में 18.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। जनवरी में हल्के वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 58.3 फीसदी की वृद्धि रही। दिसंबर तिमाही में हल्के वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 28 फीसदी की वृद्धि हुई जो सितंबर तिमाही की 21.5 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले अधिक है।

बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में लोगों ने कहा कि विभिन्न कारणों से वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में तेजी आई है। देश में नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के झटके के बाद आर्थिक गतिविधियों में सुधार हो रहा है। सकल मूल्यवद्र्धित (जीवीए) वृद्धि वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में 5.6 फीसदी तक लुढ़क गई थी क्योंकि कंपनियां जीएसटी के लिए खुद को तैयार करने में जुटी थीं। इससे विनिर्माण में 1.8 फीसदी का संकुचन और खनन में महज 1.8 फीसदी की वृद्धि हुई। हालांकि बाद में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई और दूसरी तिमाही में जीवीए वृद्धि 6.2 फीसदी और तीसरी तिमाही में यह 6.7 फीसदी रही।

पहली तिमाही में मझोले एवं भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 31.8 फीसदी का संचुकन देखा गया था जबकि दूसरी तिमाही में 20.4 फीसदी और तीसरी तिमाही में 42 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। हल्के वाणिज्यिक वाहन श्रेणी में भी यही प्रवृत्ति रही जहां पहली तिमाही में बिक्री में महज 8 फीसदी की वृद्धि के बाद की तिमाहियों में लगातार सुधार हुआ।

दूसरा, उद्योग खिलाडिय़ों और विश्लेषकों का कहना है कि विशेष तौर पर सड़क एवं खनन क्षेत्र में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढऩे से वाणिज्यिक वाहनों की मांग में तेजी आई है। अशोक लीलैंड के मुख्य वित्तीय अधिकारी गोपाल महादेवन ने कहा कि इसका एक परिणाम यह हुआ कि उद्योग ने मझोली श्रेणी से अधिक टन- 37 टन, 41 टन, 49 टन- वाली श्रेणी की ओर रुख किया। 

वाणिज्यिक वाहनों की मांग में अचानक आई तेजी का एक अन्य कारण राज्य सरकारों द्वारा ओवरलोडिंग मानदंडों का सख्ती से कार्यान्वयन भी है। रेटिंग एजेंसी इक्रा के वरिष्ठï उपाध्यक्ष (समूह) सुब्रत रे ने कहा, 'इससे पहले ट्रकों में क्षमता से अधिक माल लाद दिया जाता था लेकिन अब उत्तर प्रदेश और राजस्थान में हम ओवरलोडिंग मानदंडों का सख्ती देख सकते हैं।'

वाणिज्यिक वाहनों की मांग में तेजी का एक अन्य कारण बीएस6 उत्सर्जन मानदंडों का लागू होना भी है। विश्लेषकों का कहा है कि मांग में तेजी के साथ वाणिज्यिक वाहनों के लिए आगे बेहतर परिदृश्य दिख रहा है।
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