बदलेगा दिवालिया समाधान कानून

वीणा मणि और सुरजीत दास गुप्ता | नई दिल्ली Mar 12, 2018 10:39 PM IST

दिवालिया संहिता के तहत समाधान योजना और आसान बन सकती है क्योंकि सरकार की तरफ से नियुक्त समिति ऐसी बोली की मंजूरी के मामले में लेनदारों की समिति के लिए वोटिंग का प्रतिशत घटाने की सिफारिश करने जा रही है। 

 

कंपनी मामलों के मंत्रालय के सचिव आई श्रीनिवास की अगुआई वाली समिति की सोमवार को हुई बैठक में दिवालिया समाधान के लिए आने वाली रियल एस्टेट कंपनियों के मामलों में फ्लैट के खरीदारों को लेनदार का दर्जा देने की सिफारिश करने का फैसला लिया गया। साथ ही समिति संबंधित पक्षकार से जुड़ी उपधारा में बदलाव कर सकती है ताकि कंपनी के लिए बोली में प्रबंधन पर नियंत्रण नहीं रहने वालों को अनुमति मिल सके।

इससे आर्सेलरमित्तल को एस्सार स्टील के लिए बोली में मदद मिल सकती है। अभी किसी भी समाधान योजना में लेनदारों की समिति के 75 फीसदी वोट की दरकार होती है। सूत्रों ने कहा, इसे घटाकर 60 फीसदी किया जाएगा। समिति को महसूस हो रहा है कि वोटिंग की अनिवार्यता अभी काफी ऊंची है।


समिति ने फ्लैट के खरीदारों के मसले पर भी चर्चा की। जेपी इन्फ्राटेक के फ्लैट के खरीदारों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा तब खटखटाया जब कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में चली गई। अभी फ्लैट के खरीदार सिर्फ अपना दावा सौंप सकते हैं, लेकिन इन्हें प्राथमिकता नहीं दी जाती। वास्तव में काफी विरोध के बाद फ्लैट के खरीदारों को अपना दावा पेश करने की अनुमति दी गई।

अब उन्हें लेनदार का दर्जा दिया जा सकता है, जिससे वह दबाव वाली परिसंपत्तियों के कुछ हिस्से के लिए पात्र हो जाएंगे। सूत्रों ने कहा कि दिवालिया कानून में जोड़ी गई नई धारा 29 ए में कुछ संशोधन हो सकता है, जिसमें एक साल से ज्यादा समय तक एनपीए वाली कंपनियों के प्रवर्तकों को दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाने से रोका गया था। हालांकि उन्होंने कहा कि इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। एक साल तक डिफॉल्ट करने वालों को बोली लगाने से दूर रखा जाना जारी रहेगा।

सिर्फ उन्हीं को अनुमति दी जाएगी, जिन्हें दबाव वाली कंपनियों से बोली लगाने के लिए अनावश्यक तौर पर रोका गया है। आर्सेलरमित्तल इस आधार पर पात्रता जांच का सामना कर रही है कि क्योंकि इसके प्रवर्तक एलएन मित्तल का निवेश एनपीए वाली उत्तम गैल्वा स्टील और केएसएस पेट्रोन में था। अब उम्मीद की जा रही है कि जिनका दबाव वाली परिसंपत्तियों के प्रबंधन पर नियंत्रण न हो वह समाधान योजना के लिए बोली लगाने में सक्षम हो जाएंगे।

बैंक एस्सार स्टील के लिए बोली का दूसरा दौर शुरू कर सकते हैं जब संसद आईबीसी कानून मेंं बदलाव को मंजूरी दे देगी। आर्सेलरमित्तल और न्यूमेटल मॉरीशस एस्सार स्टील के अधिग्रहण के लिए संघर्ष कर रही हैं 
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