ट्रंप के कर से तकनीकी क्षेत्र को लगेगा झटका

रोमिता मजूमदार | मुंबई Mar 15, 2018 10:06 PM IST

अमेरिकी सरकार द्वारा लागू किए गए बेस-इरोजन ऐंड ऐंटी-एब्यूज टैक्स (बीईएटी) और कॉरपोरेट करों को 21 फीसदी तक घटाए जाने के दोहरे प्रभाव के कारण वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों की भारतीय इकाइयों पर नकारात्मक प्रभाव पडऩे की आशंका है। अमेरिकी रोजगार के अवसर को विदेश जाने से रोकने और स्थानीय स्तर पर अधिक रोजगार सृजित संबंधी राष्ट्रपति ट्रंप की योजना के तहत बीईएटी को लागू किया गया है जो इसी साल जनवरी से प्रभावी हो गया है। इसे लागू होने के बाद बड़ी अमेरिकी कंपनियों (50 करोड़ डॉलर से अधिक के कुल कारोबार वाली) को आउटसोर्सिंग मॉडल की समीक्षा करनी पड़ रही है। हालांकि फिलहाल कर की दर 5 फीसदी है लेकिन अगले साल तक दोगुना वृद्धि के साथ इसे 10 फीसदी होने का अनुमान है क्योंकि अमेरिकी प्रशासन विदेश भेजे जाने वाले कार्यों को रोकने की कोशिश कर रहा है।

ग्रांट थॉर्टन इंडिया एलएलपी की पार्टनर फातिमा हुनैद ने कहा, 'अपने अधिकांश आरऐंडडी कार्य भारत को आउटसोर्स करने वाली प्रमुख आईटी कंपनियों के विश्लेषण से पता चलता है कि बीईएटी के कारण प्रमुख कर दरों में कमी का फायदा खत्म हो जाएगा।' यह कर आउटसोर्स करने वाली कंपनियों के लिए काफी हद तक प्रमुख कॉरपोरेट कर में कमी के फायदे को खत्म कर देगा और इसलिए उन्हें आउटसोर्सिंग मॉडल पर नए सिरे से विचार करना पड़ेगा। 

ट्रंप सरकार की इस संरक्षणवादी नीतियां भारतीय कारोबारियों को हर मोर्चे पर प्रभावित कर रही हैं। उद्योग विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि वीजा आवेदन की जांच में सख्ती के कारण खारिज होने की दर बढऩे से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों को बड़ा झटका लगेगा। इस प्रकार की कंपनियां भारत में अपने निजी परिचालन केंद्र अथवा ग्लोबल इन-आउस सेंटर (जीआईसी) का इस्तेमाल करती रही हैं।
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