कंपनियों के साथ विभिन्न मसलों पर चर्चा करेगा बिजली मंत्रालय

श्रेया जय | नई दिल्ली Mar 15, 2018 10:35 PM IST

केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने प्रमुख बिजली कंपनियो के प्रमुखों को शुक्रवार को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है, जिसमें वित्त मंत्रालय के अधिकारी, इस क्षेत्र को कर्ज देने वाले भी शामिल होंगे। परियोजनाओं के दीवालिया होने, कोयले की कमी और मांग में बढ़ोतरी की रफ्तार कम होने जैसी विभिन्न समस्याओं पर इस बैठक में चर्चा होगी। 

इस बैठक में टाटा पावर, अदाणी पावर, एस्सार, वेदांता, सेमकॉर्प, सीएलपी इंडिया, जीएमआर एनर्जी, लार्सन ऐंड टूब्रो, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, जिंदल इंडिया पावर, जेपी पावर, हिंदुजा ग्रुप, हिंदुस्तान पावर, रत्तन इंडिया, बजाज एनर्जी और रिलायंस पावर के शामिल होने की संभावना है। 


इस बैठक में रेलवे बोर्ड के प्रमुख और कोयला मंत्रालय व वित्तीय सेवा विभाग के सचिव भी शामिल होंगे। इनके अलावा एनटीपीसी, पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी) ग्रामीण विद्युतीकरण निगम और केंद्रीय बिजली प्राथिकरण के प्रमुख भी उपस्थित रहेंगे। साथ ही केंद्रीय बिजली नियामक आयोग के सचिव इस बैठक का हिस्सा रहेंगे। 

इस बैठक मेंं कोयले की उपलब्धता, राज्यों द्वारा दीर्घावधि बिजली खरीद समझौते (पीपीए) की कमी, और बेकार पड़ी गैस व पनबिजली परियोजनाओं पर चर्चा होगी। एक अधिकारी ने कहा कि इन मसलों के अलावा सबसे अहम है कि हाल में दबाव वाले कर्ज को लेकर भारतीय रिजïर्व बैंक के दिशानिर्देशों पर चर्चा हो सकती है। बिजली उत्पादकों का दावा है कि उन्होंने दीवालिया माध्यम पर करीब 80,000 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाओं को डाला है। 

रिजर्व बैंक के नए नियमों में बैंकों से कहा गया है कि वे कर्ज भुगतान में एक दिन की देरी को भी डिफॉल्ट के रूप में वर्गीकृत करें। दबाव वाले खाते के समाधान की प्रक्रिया 180 दिन के भीतर पूरी की जाए। दबाव में आई बिजली उत्पादन क्षेत्र की संपत्तियों का कोई खरीदार भी नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह कुछ नियामकीय बाधाएं हैं। 

पिछले 4 साल से किसी भी राज्य ने कोई दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौता नहीं किया है। वहीं कोयला आपूर्ति कुछ सरकारी योजनाओं के माध्यम से आसान कर दी गई है, जहां अभी उत्पादन शुरू होना है। कु छ मामले नियामक आयोग के पास वर्षों से लंबित हैं और संभावित खरीदार की राह में न्यायालय का अडंगा भी है। 
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