कर्नाटक में केंद्र व राज्य सरकार के बीच रसोई गैस पर जंग

शाइन जैकब | नई दिल्ली Mar 15, 2018 10:39 PM IST

चुनाव के कुछ महीने पहले पीएमयूवाई जैसी योजना शुरू

गरीबों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने को लेकर केंद्र व कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में टकराव शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने हाल ही में नरेंद्र मोदी सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) की तरह की एक योजना शुरू की है। सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली सरकार की मुख्यमंत्री अनिल भाग्य योजना (एमएमएवाई) ऐसे समय में आई है जब कुछ ही महीने बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले 2 महीनों में राज्य सरकार को 4 पत्र लिखे हैं, जिसमें स्पष्टीकरण मांगा गया है और संयुक्त योजना के लिए कहा गया है। 

इसे राज्य सरकार ने खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार का विचार है कि इस तरह की योजना एलपीजी डीलरों के माध्यम से नहीं चलाई जानी चाहिए लेकिन इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) जैसी विपणन कंपनियां लाभ का हस्तांतरण कर रही हैं। 

पिछले महीने राज्य का बजट पेश करते हुए सिद्धरमैया ने एमएमएवाई की घोषणा की थी, जिसमें 30 लाख लाभार्थियों को दो बर्नर वाला स्टोव, गैस कनेक्शन और साल में दो रिफिल मुफ्त देने की घोषणा करते हुए इसके लिए 13.5 अरब रुपये का प्रावधान किया था। यह योजना पीएमयूवाई के पूरा होने तक चलेगी, जो मई 2016 में पेश किए जाने के बाद राज्यों में मोदी के चुनाव प्रचार मुख्य बिंदु रहता है। केंद्र सरकार की योजना के तहत कर्नाटक में लाभार्थियों की संख्या 8,80,000 है। 

इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, 'राज्य सरकार श्रम व खाद्य आपूर्ति विभाग के माध्यम से योजना चला रही है। राज्य ने इसके पहले केंद्र व केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री से संपर्क साधा था। हमने उनसे कहा कि उनकी कवायद स्थापित प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है और इसलिए इसे लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की सहमति नहीं है। हमने उनसे कहा था कि इसे ओएमसी के माध्यम से लागू करें।' 

केंद्र सरकार जहां प्रत्येक लाभार्थी परिवार को 1,600 रुपये पीएमयूवाई के तहत मुहैया करा रही है, वहीं कर्नाटक में एमएमएवाई के तहत वितरकों को 2,154 रुपये और लाभार्थी को दूसरी रिफिल के लिए 550 रुपये मिल रहे हैं। 

उपरोक्त उल्लिखित व्यक्ति ने कहा, 'अगर वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर यह योजना चलाते तो राज्य सरकार के खजाने के 13.5 अरब रुपये बचाए जा सकते थे और यह और भी व्यवस्थित योजना होती।' यह बचत इस तरह से होती कि केंद्र की सब्सिडी को भी राज्य की योजना में शामिल कर दिया जाता और राज्य को अतिरिक्त सब्सिडी मिल जाती। 

पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, पंजाब और हरियाणा सरकारें भी ऐसी योजना चला रही हैं, लेकिन उनकी योजना केंद्र के साथ तालमेल करके चल रही है। केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारें एलपीजी पर सब्सिडी पीएमयूवाई शुरू होने के पहले से दे रही हैं। ग्रामीण इलाकों के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार  ने राजीव गांधी ग्रामीण एलपीजी वितरण (आरजीजीएलवी) योजना 2009 में शुरू की थी, जिससे ग्रामीणों को रसोई गैस की सुविधा दी जा सके। 

राज्य सरकार अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) और प्राथमिकता वाले परिवार (पीएचएच) के मौजूदा लाभार्थियों को कनेक् शन मुहैया करा रही है, वहीं केंद्र सरकार सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) 2011 में निर्धारित गरीबी रेखा के नीचे रह रहे परिवारों के महिलाओं के नाम गैस कनेक् शन दे रही है। 

सूत्र ने कहा, 'राज्य की योजना का लाभ पुरुषों को भी मिल रहा है। ओएमसी रसोई गैस आवंटित कर रही हैं जबकि श्रम इंसपेक्टर और खाद्य इंसपेक्टर की वजह से इसमें दुव्र्यवस्था हो सकती है। बहरहाल इस तरह के उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिल सकती है, अगर वे मौजूदा मानकों का पालन करते हैं।'

आल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन के महासचिव चंद्र प्रकाश ने कहा, 'राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाकों में पहले ही डीलरों के माध्यम से योजना शुरू की है। बड़ा अंतर यह है कि केंद्र की योजना में केवल कनेक्शन मुफत में मिल रहा है, वहीं राज्य की योजना में कनेक् शन, स्टोव और संबंधित सामान भी मिल रहे हैं।'

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