किराये पर दी जाएंगी माल्या, नीरव की संपत्ति

अरूप रायचौधरी और इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Mar 16, 2018 10:27 PM IST

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) विजय माल्या और नीरव मोदी सहित दूसरे लोगों की जब्त संपत्तियों को सरकारी भवन निर्माण कंपनी एनबीसीसी लिमिटेड के हवाले कर सकता है। कंपनी फिर इन्हें व्यावसायिक और आवासीय उद्देश्य के लिए किराये पर देगी। 

बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक इस सप्ताह वित्त मंत्रालय में हुई एक बैठक में यह फैसला लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता वित्त सचिव हसमुख अढिय़ा ने की और इसमें ईडी के निदेशक कर्नल सिंह और एनबीसीसी के अध्यक्ष अनूप मित्तल सहित कई शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया।


अभी ईडी इन संपत्तियों को संभाल रहा है जिसे इस तरह का कोई अनुभव नहीं है। धन शोधन निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत जब्त संपत्तियों को किराये पर देकर राजस्व कमाने का कोई प्रावधान नहीं है। इस कानून में प्राथमिकता के आधार पर संशोधन किए जाने की संभावना है ताकि जब्त अचल संपत्तियों को किराये पर दिया जा सका।

एनबीसीसी के एक अधिकारी ने कहा, 'ईडी ने करीब 25,000 एकड़ जमीन और 300 प्रतिष्ठान अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें फैक्ट्रियां, फ्लैट, इमारतें और दुकानें शामिल हैं। इन संपत्तियों को एनबीसीसी को देने का प्रस्ताव है।' ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने जो संपत्तियां जब्त की हैं उनके रखरखाव का सालाना खर्च लाखों में है। इन्हें एनबीसीसी को दिया जाता है तो फिर हमारा खर्च बच जाएगा। कुछ संपत्तियों का इस्तेमाल हम कार्यशालाओं के लिए करते हैं लेकिन अधिकांश बेकार पड़ी हैं।'

अधिकारी ने कहा कि 129 अरब रुपये के नीरव मोदी घोटाले के सिलसिले में छापेमारी के दौरान जो संपत्तियां जब्त की गई हैं, उन्हें अभी कुर्क नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि नियमों के मुताबिक न्यायिक अधिकारी ने इन लोगों के वकीलों को 180 दिन का समय देकर पूछा है कि उनकी संपत्तियों को कुर्क क्यों नहीं किया जाए। हमारे पास इन जब्त संपत्तियों को कुर्क करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। इसके बाद एनबीसीसी के साथ अनुबंध होगा और हम उसे ये संपत्तियां सौंप देंगे।

जानकारी के मुताबिक ईडी के अनुरोध पर वित्त मंत्रालय ने 6 महीने पहले यह प्रस्ताव रखा था क्योंकि उचित रखरखाव के अभाव में ये संपत्तियों बर्बाद हो रही थीं। सरकार और सरकारी कंपनियों से मिली संपत्तियों के रखरखाव के लिए एनबीसीसी की एक विशेष सहायक कंपनी है। प्रस्ताव के मुताबिक कुर्क संपत्तियों के किराये के रूप में आने वाले राजस्व में 20 फीसदी हिस्सेदारी होगी। एनबीसीसी के सूत्रों ने कहा कि ईडी के साथ अनुबंध हुआ तो फिर दूसरी खुफिया एजेंसियों और पुलिस के साथ भी इस तरह के करार हो सकते हैं।
कीवर्ड प्रवर्तन निदेशालय, ईडी, विजय माल्या, नीरव मोदी,

  
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