'मंदी के बावजूद हमारा प्रदर्शन अच्छा'

राघवेंद्र कामत और अभिनीत कुमार |  Mar 16, 2018 10:48 PM IST

मुंबई के पवई में अपनी टाउनशिप के लिए चर्चित हीरानंदानी समूह ने पिछले 30 वर्षों में 550 एकड़ भूमि को विकसित किया है। समूह के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक 68 वर्षीय निरंजन हीरानंदानी अपनी नई पहल हीरानंदानी कम्युनिटीज के तहत अगले पांच साल में 25 गुना भूमि को विकसित करने की योजना बनाई है। राघवेंद्र कामत और अभिनीत कुमार की हीरानंदानी से हुई विस्तृत बातचीत के अंश: 

रियल एस्टेट बाजार किस ओर रुख कर रहा है?

नोटबंदी, जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर), रेरा (रियल एस्टेट नियमन एवं विकास अधिनियम) और दिवालिया संहिता के बाद रियल एस्टेट में मंदी का दौर चल रहा है। इन चार सुनामी के कारण पैदा हुई जबरदस्त मंदी में कई डेवलपर खत्म हो चुके हैं। हालांकि यह मंदी पूरी तरह बाजार द्वारा संचालित नहीं है क्योंकि उसके लिए पूरा माहौल जिम्मेदार है और विनियमन के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। हालांकि इसके कुछ अपवाद भी हैं। रिहायशी कारोबार में हम काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और हमारा वाणिज्यिक कारोबार भी अच्छा है। 

क्या आपको लगता है कि अब कारोबार में वाणिज्यिक श्रेणी की अहम भूमिका होगी?
पिछले दो वर्षों के दौरान वाणिज्यिक श्रेणी में हमने उतना कारोबार किया है जितना करीब 15 वर्षों में किया था। पिछले 14 वर्षों के दौरान पवई में हमने 55 लाख वर्ग फुट वाणिज्यिक जगह को तैयार किया है। जबकि अक्टूबर 2016 में हमने करीब 1 अरब डॉलर में 42 लाख वर्ग फुट जगह ब्रुकफील्ड को बेच दी। पिछले दो वर्षों में हमने 50 लाख वर्ग फुट जगह तैयार की और उसमें से 30 लाख वर्ग फुट जगह टीसीएस को बेच दी। हमने जापान के एनटीटी को दो डेटा सेंटर भी बेचे हैं। लेकिन हमारा मॉडल टाउनशिप है। मैं समझता हूं कि हमारे सभी कारोबार वृद्धि कर रहे हैं चाहे रिहायशी हो अथवा होटल, कार्यालय या अस्पताल। हमारे होटलों में करीब 90 फीसदी कमरे भरे होते हैं जबकि अन्य के मामलों में यह आंकड़ा 40 से 50 फीसदी होता है। ऐसा इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि हमारे होटल हमारे टाउनशिप से जुड़े हुए हैं। हम अपनी मांग और माहौल तैयार करते हैं।

अगले पांच वर्षों में आप अपने कारोबार को कहां देखते हैं?
पिछले 15 से 20 वर्षों के दौरान हमने केवल पवई में काम किया जहां 250 एकड़ भूमि है। उसके बाद हमने थाणे में काम शुरू किया जहां 350 एकड़ भूमि है जिसे हम 20 वर्षों से कर रहे हैं। अब हम पांच गुना वृद्धि की योजना बना रहे हैं ताकि अगले पांच वर्षों में रफ्तार 25 गुना अधिक हो सके। यह कठिन है लेकिन हमारे ऊपर कोई ऋण बोझ नहीं है और इसलिए यदि ऐसा नहीं होगा तो हम खत्म नहीं हो जाएंगे बल्कि हमारी रफ्तार थोड़ी कम हो जाएगी। चेन्नई में थोड़ी भूमि के अलावा हमारे पास भूमि के लिए कोई ऋण नहीं है। इसलिए हमें केवल कार्यशील पूंजी की जरूरत होगी। वास्तव में बाजार यह तय करेगा कि हम कहां जाते हैं।

रियल एस्टेट में आई मंदी के कारण क्या हम भूमि कीमतों में गिरावट की उम्मीद कर सकते हैं?
भूमि कीमतों में नरमी आ रही है लेकिन मुझे नहींं लगता कि इसमें और गिरावट आएगी क्योंकि सरकार दाम बढ़ा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने चार से पांच गुना भाव पर भूमि अधिग्रहण किया है। उदाहरण के लिए, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे के लिए सरकार ने पांच गुना कीमत दी है। इसलिए सरकार कीमतों को हवा दे रही है। यहां तक कि शहरी क्षेत्र में भी सरकार दरें बढ़ा रही है।
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