एसएमई प्लेटफॉर्म पर स्टार्ट-अप को सूचीबद्ध होने की अनुमति देगा नियामक सेबी

पवन बुरुगुला | मुंबई Mar 16, 2018 10:57 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) एक ऐसे ढांचे पर काम कर रहा है जिससे नई पीढ़ी की कंपनियां एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने में सक्षम होंगी। इस प्लेटफॉर्म का गठन छोटे कॉरपोरेट हाउस को इक्विटी पूंजी जुटाने की खातिर प्रोत्साहित करने के लिए हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, स्टार्ट-अप को एसएमई प्लेटफॉर्म पर हैसियत व लाभदायकता के मोर्चे पर विशेष छूट की पेशकश की जाएगी। भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों, सेबी और बाजार के भागीदारों के बीच स्टार्ट-अप की सूचीबद्धता के ढांचे को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। यह कदम तब देखने को मिल रहा है जब नई पीढ़ी की कंपनियों की सूचीबद्धता के लिए विशेष क्षेत्र संस्थागत ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (आईटीपी) आगे नहीं बढ़ पाया। 

सूत्रों ने कहा कि यह विचार छोटे व मध्यम आकार वाले स्टार्ट-अप को पूंजी जुटाने का मौका मुहैया कराने के लिए सामने आया है, जो उच्च अनुपालन नियम के चलते और आईटीपी प्लेटफॉर्म पर विचार करने की अनिच्छा के चलते मुख्य एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं करा सकते। हालांकि आईटीपी प्लेटफॉर्म का डिजाइन स्टार्टअप को सूचीबद्ध कराने के लिए तैयार किया गया था, लेकिन ऐसे प्लेटफॉर्म पर नकदी जैसी चीजों को लेकर कंपनियों को संशय था। दूसरी ओर, एसएमई प्लेटफॉर्म छोटी कंपनियों के लिए पूंजी की जरूरत पूरा करने में कामयाब रहा है और यहां अब तक 200 से ज्यादा सूचीबद्ध हो चुकी हैं। 


सेबी के नियम के मुताबिक, स्टार्टअप प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कंपनी की अधिकतम चुकता पूंजी 25 करोड़ रुपये हो सकती है। हालांकि प्राइवेट इक्विटी से रकम जुटाने वाले स्टार्टअप की चुकता पूंजी ज्यादा है, जो इस क्षेत्र में उसे सूचीबद्ध कराने के लिहाज से अपात्र बनाता है।

स्टार्टअप में से ज्यादातर या तो पीई या फिर ऐंजल निवेशकों की तरफ से समर्थित हैं, ऐसे में बाजार नियामक एसएमई क्षेत्र के लिए पेशेवर नियंत्रित कंपनी की अवधारणा लागू कर सकता है। ऐसी प्रगति से पीई निवेशकों व ऐंजल फंडों को एसएमई शेयर बिक्री के जरिए निकलने का मौका मिलेगा और वह भी प्रवर्तक के लिए जरूरी अनुपालन को पूरा किए बिना। मौजूदा नियम के तहत प्रवर्तकों को कंपनी की कम से कम 20 फीसदी हिस्सेदारी लेनी होती है। इसके तहत उस कारोबार में न्यूनतम तीन साल का अनुभव भी अनिवार्य है।

एक सूत्र ने कहा, चर्चा अग्रणी चरण में है और अगले एक महीने में इस बारे में घोषणा होने की उम्मीद की जा सकती है। न सिर्फ सेबी बल्कि एक्सचेंज भी नई पीढ़ी की कंपनियों के पास पहुंचकर इनपुट मांग रहे हैं। अगर छूट दी जाती है तो एसएमई प्लेटफॉर्म स्टार्टअप के लिए पूंजी जुटाने के व्यावहारिक विकल्प के तौर पर उभर सकता है।

मुख्य आईपीओ की तरह सेबी एसएमई के आईपीओ का सीधे तौर पर विनियमन नहीं करता। इस बारे में ज्यादातर अधिकार एक्सचेंजों को दिए गए हैं। एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कंपनियों को छह महीने में एक बार नतीजे की सूचना देनी होती है जबकि मुख्य एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों को तीन महीने में ऐसा करना होता है। 
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