एलऐंडटी को पूर्वी गलियारे में ठेका

अमृता पिल्लई | मुंबई Mar 16, 2018 11:00 PM IST

ईस्टर्न रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण कार्य को गति मिल गई है। खुर्जा से पिलखानी के बीच सिंगल ट्रैक गलियारे के निर्माण का ऑर्डर इंजीनियरिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन ऐंड टुब्रो को मिला है। एलऐंडटी ने शुक्रवार को कहा कि उसने ईस्टर्न डेडीकेटेड रेलवे फ्रेट कॉरिडोर के सिंगल ट्रैक गलियारा का पैकेज हासिल किया है। कंपनी को 28.64 अरब रुपये में 222 किलोमीटर लाइन के निर्माण का ठेका मिला है। 

 

कंपनी ने बीएसई को दिए गए बयान में कहा है, 'यह पूर्वी समर्पित मालवाहक गलियारे में लॉर्सन ऐंड टुब्रो का पहला ईपीसी सिविल, स्ट्रक्टर और ट्रैक परियोजना है। पश्चिमी समर्पित मालवाहक गलियारे में एलऐंडटी की पहले से सिविल पैकेज में 71 प्रतिशथ औ्र इलेक्ट्रिकल पैकेज में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है।'

कंपनी ने बयान में कहा है, 'काम करने की संभावनाओं में यार्ड सहित सिंगल रेलवे ट्रैक का निर्माण, 75 बड़े और 588 छोटे पुलों, 1 रेल ओवरब्रिज का नवीकरण, 4 रेल फ्लाईओवर, 21 स्टेशनों के साथ इससे जुड़े सभी निर्माण कार्य किया जाना शामिल है। इस परियोजना को पूरी तरह से मशीनीकृत तरीके से पूरा किए जाने की योजना है, जिसमे रेलवे निर्माण से संबंधित अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।' 

डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन आफ इंडिया (डीएफसीसीआईएल) भारतीय रेलवे की विशेष उद्देश्य इकाई है, जो डेटीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को बनाने के लिए बनाई गई है। एलऐंडटी को मिली परियोजना का वित्तपोषण विश्व बैंक करेगा और यह 1856 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न कॉरिडोर का हिस्सा है। 

ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में दो अलग क्षेत्र हैं- पश्चिम बंगाल के दानकुनी से उत्तर प्रदेश के खुर्जा के बीच 1409 किलोमीटर लंबी विद्युतीकृत दोहरी लाइन का निर्माण और लुधियाना (धानदारीकला) से खुर्जा-दादरी के बीच सिंगल ट्रैक विद्युतीकृत लाइन का निर्माण, जो पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेगी। 

डीएफसीसीआईएल ने सभी सिविल, इलेक्ट्रिकल और सिगनलिंग और टेलीकॉम ठेके देने का काम पूरा कर लिया है, जो पश्चिमी गलियारे के लिए दिए जने थे और अब पूर्वी गलियारे के ठेके देने की प्रक्रिया चल रही है। डीएफसीसीआईएल के मुताबिक 519.06 अरब रुपये के ठेके अब तक दिए जा चुके हैं। डेटीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाना है और पहले चरण का काम इस साल नवंबर में पूरा हो जाएगा। अंतिम चरण का काम 2020 के पहले पूरा हो जाएगा। 
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