हीरा व्यापार, परिवार और रिश्तेदार!

पवन लाल |  Mar 16, 2018 11:24 PM IST

देश का हीरा कारोबार दूसरे कारोबारों से किस तरह अलग है? कई पीढिय़ों से इस कारोबार पर एक या दो समुदायों का ही वर्चस्व रहा है और खासकर शादी के कारण उनमें आपस में गहरे संबंध हैं। यही वजह है कि कपड़ा या स्वर्ण उद्योग की तुलना में हीरा उद्योग सभी के लिए खुला नहीं है। लेकिन परिदृश्य अब बदल रहा है। 

कभी हीरा उद्योग पर यहूदियों का दबदबा था लेकिन 1950 और 1970 के दशक में भारतीय प्रवासियों के खासकर एंटवर्प जाने से इस कारोबार में पालनपुरी जैन का वर्चस्व हो गया। इसके बाद मारवाड़ी और सिंधी भी इसमें कूद गए। जेम्स ऐंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के मुताबिक देश का हीरा उद्योग करीब 23 अरब डॉलर का है। रत्न और आभूषण कारोबार में इसकी हिस्सेदारी एक तिहाई से थोड़ा ज्यादा है। देश में हीरा कारोबार से जुड़ी करीब 6,500 कंपनियां हैं। इनमें से 6 फीसदी यानी करीब 400 कंपनियां पालनपुरी जैनों की है। लेकिन उनकी आपस में गहरी रिश्तेदारी है। 


अब फायरस्टोन डायमंड्स के फरार मालिक नीरव मोदी का ही उदाहरण लीजिए। वह गीतांजलि जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी के भानजे हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि नीरव की बहन पूर्वी की शादी मयंक मेहता से हुई है। वह मोना के भाई हैं जिनकी शादी रोजी ब्लू के मालिक रसेल मेहता से हुई है। मोना की चचेरी बहन प्रीति की शादी मेहुल चोकसी से हुई है जो नीरव के मामा हैं। यह रिश्ता यहीं खत्म नहीं हो जाता है। चोकसी की बेटी प्रियंका की शादी 2011 में एंटवर्प के हीरा कारोबारी आकाश मेहता से हुई थी। उस समय प्रियंका ए. जैफ का कामकाज देख रही थीं जिसमें नीरव ने निवेश किया था।  

फिर 2002 में फिल्म फाइनैंसर भरत शाह के भतीजे और हीरा कारोबारी विशाल शाह की शादी बेल्जियम की निवासी और वीएसएम डायमंड्स चलाने वाले परिवार से संबंध रखने वाली श्रेया मेहता से हुई। वीएसएम डायमंड्स को सिंथेटिक हीरों को असली बताकर बेचने के आरोप में मुंबई के एक्सचेंजों से निलंबित कर दिया गया था। कुछ मामलों में यह तो रिश्ता मुख्य कारोबारी हलकों तक फैला हुआ है। विनसम डायमंड्स ऐंड ज्वैलरी के फरार चल रहे मालिक जतिन मेहता का मामला कुछ ऐसा ही है। जतिन के बेटे सूरज की शादी कृपा से हुई है जो गौतम अदाणी के भाई विनोद शांतिलाल अदाणी की बेटी से 2012 में हुई थी। 

पालनपुरी जैन पूरी तरह शाकाहारी हैं और खाने में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इस समुदाय में दूसरे लोगों का प्रवेश वर्जित है। यही वजह है कि हीरा उद्योग से जुड़े परिवार आपस में ही रिश्ते बनाते हैं। लेकिन एक जौहरी का कहना है कि इसकी एक वजह यह भी है कि हीरा कारोबार में भारी लेनदेन होता है जिसमें विक्रेता और खरीदार दोनों के स्तर पर गोपनीयता की जरूरत होती है। इसलिए जब कारोबारी साझेदार आपस में रिश्तेदार हों तो काम करना आसान हो जाता है।
हीरा कारोबार में अधिकांश लेनदेन भरोसे और विश्वास पर होता है। इस कारोबार में एक व्यापारी को कच्चे हीरे दूसरे को बेचने पड़ते हैं और किसी और से तराशे हीरे लेने पड़ते हैं। यह चक्र लगातार चलता रहता है और संबंधित परिवार रिश्तों को एक बीमे की तरह लेते हैं। 

एक हीरा कंपनी के मुख्य कार्यकारी ने कहा कि 30 साल पहले हीरा कारोबार पूरी तरह असंगठित था और भरोसे से चलता था। उसने कहा, 'पालनपुरी जैनों की आपस में करीबी रिश्तेदारी है और सभी शादी, सालगिरह, निधन और जन्मदिन पर सभी आपस में मिलते हैं।'

लेकिन पालनपुरी जैनों की नई पीढ़ी में अधिकांश का लालन पालन बेल्जियम में हुआ और वे यूरोप या अमेरिका चले गए। इससे उनके बीच परंपरागत रिश्ता खत्म हो रहा है। मारवाड़ी तथा काठियावाड़ी जैसे दूसरे समुदाय हीरा उद्योग में उभर रहे हैं। इसलिए हीरा उद्योग में एक गांव, एक परिवार की अवधारणा अब बदल रही है। पूरी दुनिया में इस उद्योग में ऐसे ही कारोबार होता है? एक जानकार कहते हैं कि इसमें समूहों में काम होता है। स्पेन में धर्म आधारित ज्वैलरी के लिए समूह हैं। इटली में सोने के फैशनेबल उत्पादों के क्लस्टर हैं। भारत में जयपुर में रत्न, आगरा में चांदी, कोलकाता में हस्तनिर्मित आभूषणों के लिए, सौराष्ट्र और गुजरात में हीरे के लिए और ओडिशा में सोने-चांदी के तारों के लिए क्लस्टर हैं। ये क्लस्टर ज्यादा संगठित हो सकते हैं लेकिन उनमें फिलहाल क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना नहीं है। 
कीवर्ड भारत, जयपुर, रत्न, आगरा, चांदी, कोलकाता, सौराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, चांदी,

  
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