विशेष सेवा व्यापार पर भारत का जोर

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Mar 18, 2018 09:36 PM IST

नई दिल्ली में सोमवार को शुरू हो रही दो-दिवसीय अंतर-मंत्रालयी बैठक विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों को एकमंच पर लाएगी। इस बैठक में भारत के लिए सेवा व्यापार के व्यापक उदारीकरण के लिए राह तैयार होने और बढ़ते संरक्षणवाद के खिलाफ वैश्विक गठबंधन बनाए जाने की संभावना है।  यह शिखर बैठक भारत द्वारा ऐसे समय में आयोजित की जा रही है जब डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के नेतृत्व में अमेरिका डब्ल्यूटीओ की जरूरत पर बार बार सवाल उठा चुका है। व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि यह बैठक खाद्य सुरक्षा के लिए कृषिगत भंडारण के स्थायी समाधान जैसी भारत से जुड़ी चिंताओं के समाधान के लिहाज से भी अहम होगी।
 
हालांकि यूरोपीय संघ और कनाडा के नेतृत्व में संपन्न देशों ने ई-कॉमर्स के लिए वैश्विक नियम, निवेश को अनुकूल बनाने और एमएमई के लिए नियम, लिंग समानता को बढ़ावा देने और मत्स्य पालन पर सब्सिडी में कमी समेत कई मुद्दों को लगातार उठाया है।  इसके अलावा भारत डब्ल्यूटीओ की विवाद निपटान संस्था के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति के मुद्दे के तेज समाधान पर भी जोर देगा। वरिष्ठï व्यापार विश्लेषक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बिस्वजीत धर ने कहा, 'अमेरिका ने अकेले ही सात सदस्यीय डीएसबी के लिए जजों की नियुक्ति को रोक दिया है। मौजूदा समय में तीन सदस्य सेवानिवृत हो चुके हैं और चौथा भी जल्द सेवानिवृत होने वाला है।' भारत डब्ल्यूटीओ के पिछले अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन के दौरान भी अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में इस मुद्दों को उठा चुका है। भारतीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए जल्द कदम उठाए जाने का अनुरोध कर चुके हैं।
 
बहुपक्षीय मुद्दों पर ज्यादा फोकस
 
वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया ने हाल में कहा कि बहुपक्षीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किए जाने से सभी सदस्य प्रभावित हो रहे हैं जिसका मतलब होगा कि यह मंच द्विपक्षीय समस्याओं पर चर्चा के लिए एक उपयुक्त स्थान साबित नहीं होगा।  हालांकि इस शिखर बैठक का आमंत्रण लगभग 50 देशों को भेजा गया था, लेकिन लगभग 10 देशों के अंतर-मंत्रालयी प्रतिनिधि मंडलों ने इसमें शामिल होने की पुष्टिï की, जिनमें रूस, इंडोनेशिया, सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका मुख्य रूप से शामिल हैं। अन्य देशों का प्रतिनिधित्व खासकर पाकिस्तान को छोड़कर, राजनीतिक प्रतिनिधियों और उप-मंत्रियों के जरिये किया जाएगा। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच राजनयिकों को लेेकर मौजूदा तनाव का हवाला देते हुए इस शिखर बैठक में शिरकत करने से इनकार कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि भारत इस शिखर सम्मेलन में इंडोनेशिया के साथ कई बैठकें करेगा। इंडोनेशिया प्रस्तावित क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी पर मौजूदा वार्ताओं के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण देश है। सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा ब्रिक्स देशों के साथ भारत के समर्थन को लेकर भी इन देशों के प्रतिनिधियों से वार्ताएं की जा सकती हैं। इस शिखर सम्मेलन में अमेरिका का प्रतिनिधित्व अमेरिकी उप-व्यापार प्रतिनिधि और जिनेवा में डब्ल्यूटीओ मुख्यालय में मिशन के प्रमुख डेनिस शिया द्वारा किया जाएगा। 
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