डब्ल्यूटीओ के सामने अहम चुनौतियां : अजेवेदो

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Mar 19, 2018 09:51 PM IST

विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक रॉबर्टो अजेवेदो ने आज कहा कि संरक्षणवाद व कुछ अन्य वजहों से वैश्विक कारोबार व्यवस्था अहम चुनौतियों से जूझ रही है। उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भारत के कारोबार जगत के दिग्गजों के साथ संवाद सत्र के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'हम अंदर और बाहर तमाम चुनौतियों से जूझ रहे हैं। सि समय वैश्विक रूप से कारोबारी माहौल बहुत जोखिम भरा है।' वह इस समय भारत की ओर से आयोजित दो दिवसीय लघु मंत्रिमंडलीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली में हैं, जो सोमवार से शुरू हुआ। 
 
महानिदेशक ने यह भी कहा कि सदस्य देशों के बीच विवाद निपटान व्यवस्था को लेकर बहुपक्षीय निकाय डब्ल्यूटीओ में हाल के खींचतान को लेकर भी समाधान की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'हमारे यहां विवाद निपटान व्यवस्था है, जिसमें अपीली निकाय में सदस्यों की नियुक्तियां नहीं हो रही हैं। यह भारत के साथ बातचीत में अहम मसला होगा।'  निकाय में न्यायाधीशोंं की कमी सदस्य देशों के बीच गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह प्रमुख निकाय है, जो सदस्य देशों के बीच कारोबारी विवादों पर मध्यस्थ का काम करता है। इस समय इस तरह की शिकायतों की ढेर लग गई है। अजेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयरस में डब्ल्यूटीओ के पिछले सम्मेलन में भारत ने कई बार यह मसला उठाया और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने निवेदन किया कि इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है। 
 
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वरिष्ठ कारोबार विशेषज्ञ प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि अमेरिका ने एकतरफा और जानबूझकर न्यायधीशों की नियुक्ति में व्यवधान खड़ा कर रखा है। सात सदस्योंं वाले विवाद निपटान निकाय में न्यायधीशोंं की नियुक्ति नहीं हो रही है। उन्होंने कहा, 'उन्होंने कहा कि इनमें से 3 सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं जबकि चौथे सदस्य जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं।' अमेरिका लगातार विभिन्न चर्चाओं के केंद्र में रहा है। ट्रंप प्रशासन ने कई बार डब्ल्यूटीओ पर यह कहकर हमला किया कि यह एक अप्रभावी व्यवस्था है और उसने भारत सहित कई देशों के खिलाफ कारोबारी जंग की धमकी दी है। अजवेदो का कहना है कि अमेरिका डब्ल्यूटीओ का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर अमेरिका की कुछ चिंता है। अजेवेदो ने कहा, 'अमेरिका का कहना है कि 1995 में डब्ल्यूटीओ के  आने के बाद से दुनिया में तमाम अहम बदलाव हुए हैं और उन्हें देखते हुुए डब्ल्यूटीओ में कुछ उन्नयन और सुधार की जरूरत है। इस मसले पर चर्चा चल रही है और भारत की ओर से अगर कोई उपयोगी मसला सामने आता है तो उसे जिनेवा में रखा जाएगा और सभी विंदुओं को लेकर आगे बढऩे की कवायद की जाएगी।'
 
पिछले साल दिसंबर में ब्यूनस आयरस मेंं डब्ल्यूटीओ की मंत्रिस्तरीय बातचीत असफल रही थी, जिसके बाद भारत ने मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक बुलाई है। इस बैठक के एजेंडे की पहले घोषणा नहींं की गई है। लेकिन वाणिज्य सचिव रीता तेवतिया का कहना है कि दूसरे डब्ल्यूटीओ मिनी मंतित्रस्तरीय बैठक की मेजबानी भारत करेगा। पहली बैठक 2009 में हुई थी। बढ़ते संरक्षणवाद की चुनौतियों को देखते हुुए यह अहम है।  सीआईआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फरवरी 2017 में भारत दौरे की ही तरह अजेवेदो फिर से ई-कॉमर्स को लेकर नियम बनाने का प्रस्ताव लेकर आए हैं। यह प्रस्ताव अमेरिका के नेतृत्व मेंं अमीर देशों व भारत सहित विकासशील देशों के बीच विवाद की वजह बना हुआ है, जो इस प्रस्ताव के सख्त खिलाफ हैं।
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