'लग्जरी सामान की परिभाषा पर हो काम'

दिलाशा सेठ | नई दिल्ली Mar 20, 2018 10:05 PM IST

जीएसटी दर पर सरकार को दिए सुझाव

पीडब्ल्यूसी इंडिया ने सुझाव दिया है कि 28 प्रतिशत जीएसटी दर को 20-22 प्रतिशत पर लाया जाना चाहिए और 18 तथा 12 प्रतिशत कर ढांचे को मिलाकर 14-16 प्रतिशत के बीच कोई दर तय की जानी चाहिए
जीएसटी परिषद ने नवंबर में 200 से ज्यादा सामान की दरों में की थी कटौती

प्रमुख ऑडिट फर्म पीडब्ल्यूसी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि सरकार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की सबसे ऊंची 28 प्रतिशत दरोंं को मझोले स्तर की दरों में समाहित करने पर विचार करने की जरूरत है। 'जीएसटी के 200 दिन' शीर्षक से अपनी रिपोर्ट में पीडब्ल्यूसी इंडिया ने सुझाव दिया है कि 28 प्रतिशत जीएसटी दर को 20-22 प्रतिशत पर लाया जाना चाहिए और 18 प्रतिशत और 12 प्रतिशत कर ढांचे को मिलाकर 14-16 प्रतिशत के बीच कोई दर तय की जानी चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है, 'सरकार की प्राथमिकता सूची में इस साल शामिल सामानों पर जीएसटी दरें और कम की जानी चाहिए। 28 प्रतिशत कर ढांचे में आने वाले सामान की संख्या में खासी कमी हो गई है, ऐसे में सरकार को दरें 28 प्रतिशत से घटाकर 20-22 प्रतिशत रखने पर विचार करना चाहिए।' जीएसटी परिषद ने नवंबर में हुई बैठक में 200 से ज्यादा सामान की दरों में कटौती कर दी थी। 178 वस्तुओं पर कर की दरें 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गईं, जिसमें च्युइंग गम, शैंपू, डिटर्जेंट, चॉकलेट, ब्यूटी प्रोडक्ट और सैनिटरीवेयर शामिल हैं। इसके अलावा लेदर क्लोदिंग, कुकर, स्टोव, आफ्टर शेव, डिऑडरेंट, डिटर्जेंट, वाशिंग पाउडर, रेजर और ब्लेड, कटलरी, स्टोरेज वाटर हीटर, बैटरी, गॉगल्स, कलाई घड़ी और चटाई पर कर की दरों में भी कटौती की गई थी।

इस समय सिर्फ 50 सामान पर 28 प्रतिशत कर लगता है, जिनमें एसी, रेफ्रिजरेटर और कैमरे शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, 'यह महत्त्वपूर्ण है कि नीति निर्माता आज की दुनिया के रहन सहन के स्तर के मुताबिक लग्जरी सामान की परिभाषा पर फिर से विचार करें।' जीएसटी 1 जुलाई को लागू किया गया था और उसके बाद उसे उद्योग जगत से मित्रवत बनाने के लिए कई बदलाव कि ए गए। दरों मेंं कटौती के अलावा रिटर्न दाखिल करना आसान किया गया।  पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'यह उम्मीद है कि जीएसटी-2 पर इस समय काम चल रहा होगा, जिसमें पहले की तुलना में बहुत सुधार होगा।' 

पीडब्ल्यूसी ने आगे यह भी सुझाव दिया है कि करों को वैश्विक धारणा के अनुरूप किया जाना चाहिए। साथ ही इसमें से कानूनी खामियां खत्म कर स्पष्टता लाई जानी चाहिए। अनुपालन से संबंधित जरूरतोंं जैसे जीएसटी मुक्त निर्यात के मामले में लेटर आफ अंडरटेकिंग का सरलीकरण किया जाना चाहिए।  रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पष्टता और खामियोंं की वजह से जीएसटी प्रभावित हुआ है और यह लागू होने के बाद ही सामने आया है। इसके कुछ प्रावधान विरोधाभासी हैं।

डॉयचे पोस्ट डीएचएल ग्रुप के भारत के कर प्रमुख वरुण धवन ने कहा, 'यह उम्मीद है कि जीएसटी परिषद ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स पर कराधान वैश्विक ढांचे के मुताबिक बनाएगी।' मुनाफाखोरी रोधी नियमों के भारी भरकम नियम भी चिंता के विषय हैं। इसको लेकर स्पष्टता नहीं है कि क्या कंपनी किसी उत्पाद के दाम न घटाने का विकल्प चुन सकती है या उसके बदले बढ़ी हुई मात्रा या छूट की पेशकश कर सकती है।

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