वैश्विक कारोबारी जंग का होगा भारत के निर्यात पर असर

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Mar 23, 2018 09:26 PM IST

अमेरिका और चीन के बीच चल रही वैश्विक कारोबारी जंग से भारत से होने वाले निर्यात पर असर पड़ सकता है। इस तनातनी से मांग में गिरावट और ज्यादा लागत से कीमतें तेज हो सकती हैं। केयर रेटिंग ने एक रिपोर्ट में शुक्रवार को कहा, 'शुल्क लगाने की जंग ऐसे समय में छिड़ी है जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था अभी मंदी के दौर से निकल रही थी। इस कारोबारी जंग की वजह से अगर वैश्विक कारोबार की मात्रा कम होती है तो इसका असर हमारे निर्यात पर पडऩा तय है। वित्त वर्ष 19 में निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया है, जो संभवत: न हो पाए।' रिपोर्ट में कहा गया है, 'वैश्विक वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है क्योंकि कारोबारी जंग का मतलब है कि कीमतें बढ़ेंगी और इन दो प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में वृद्धि कम होगी। इससे हमारे निर्यात पर असर होगा।' 

इसके अलावा अगर मौजूदा कारोबारी जंग से झटके जारी रहे तो यह उम्मीद है कि अन्य द्वितीयक बाजार प्रभावित होंगे, जिनका इन दोनों देशों से बड़ा कारोबारी संपर्क है। वैश्विक जीडीपी 75.3 लाख करोड़ डॉलर की है और इसमें अमेरिका व चीन की हिस्सेदारी क्रमश: 19.4 लाख करोड़ डॉलर और 11.9 लाख करोड़ डॉलर है।  विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कारोबारी जंग के बाद मुद्रा में उतार चढ़ाव होता है। भारत का निर्यात पिछले एक साल से बढ़त की राह पर है, क्योंकि वैश्विक मांग तेजी पकड़ रही है। इंडिया रेटिंग ऐंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, 'निर्यात मुद्रा दरों की तुलना में वैश्विक मांग पर ज्यादा निर्भर होता है और भारत का निर्यात स्थिर बने रहने की उम्मीद है और अगले वित्त वर्ष में इसमें बढ़ोतरी होगी। लेकिन इस तरह के वैश्विक बदलाव का प्रक्रिया पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।' 


विशेषज्ञों ने कहा कि मुद्रा में उतार चढ़ाव का दौर आने की पूरी संभावना है कि जब भी कारोबारी जंग होती है तो मुद्रा बाजार पर उसका उल्लेखनीय असर होता है।  पिछले एक साल से भारतीय रुपये में स्थिरता बनी हुई है और उम्मीद की जा रही है कि दीर्घावधि के हिसाब से इसमें स्थिरता बनी रहेगी क्योंकि निवेशक अर्थव्यवस्था में धन लगा रहे हैं। भारत पर निवेशकों के भरोसे का असर है कि ट्रंप द्वारा चीन पर शुल्क लगाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को रुपया प्रति अमेरिकी डॉलर 65.01 पर बंद हुआ। 

यहां तक कि गुरुवार को भी अमेरिकी फेडरल रिजïर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बाद रुपया मजबूत हुआ था। अमेरिका सरकार के इस कदम से अमेरिकी मुद्रा मजबूत होने और दुनिया की अन्य मुद्राओं के कमजोर होने की उम्मीद है। बहरहाल विशेषज्ञों का अब कहना है कि बाजार अप्रत्याशित परिणाम दे सकता है।  फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, 'कुल मिलाकर रुपया मजबूत होने की उम्मीद है और इससे निर्यात और महंगा हो जाएगा और इससे भारत का निर्यात अप्रतिस्पर्धी होने का डर है। रुपया और चीनी युआन के अलावा अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की मुद्राओं में गिरावट की उम्मीद है।'

इसी बीच भारत   के उद्योग जगत के दिग्गजों ने सरकार से कहा है कि वह विश्व व्यापार संगठन में बातचीत के लिए आगे कदम बढ़ाए, जिससे विवादों को जल्द से जल्द निपटाया जा सके।  फेडरेशन आफ इंडियन चैंबर आफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रशेश शाह ने कहा, 'वैश्विक कारोबारी जंग को खत्म करने की कवायद में भारत अहम भूमिका निभा सकता है, जिससे वैश्विक कारोबार के पटरी से उतरने की संभावना है। यह जरूरी है कि विश्व व्यापार संगठन प्रक्रिया को जारी रखे और बहुपक्षीय संगठनों को और मजबूत बनाकर वैश्विक कारोबारी विवादों को निपटाया जाए और कानून आधारित वैश्विक व्यापार हो सके।' 

भारत की उन कंपनियों के लिए चिंता की बात ज्यादा है, जिनका कारोबार इन दो देशों में है। अमेरिका, भारत का बड़ा निर्यात केंद्र है, जहां 2016-17 में 42.21 अरब डॉलर का निर्यात हुआ जबकि इसी साल चीन, भारत में माल भेजने वाला सबसे बड़ा देश रहा।  चीन के साथ भारत का कारोबारी घाटा बढ़कर 51 अरब डॉलर हो गया है। अब चीन अपना माल खपाने के लिए बाजार की तलाश करेगा ऐसे में भारत में चीनी सामान का आयात और ज्यादा बढ़ सकता है। 
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