'नहीं लगाया जा सकता सेवा कर'

इंदिवजल धस्माना | नई दिल्ली Mar 25, 2018 09:55 PM IST

अप्रत्यक्ष कर न्यायाधिकरण ने रिवर्स चार्ज प्रणाली के तहत जम्मू-कश्मीर को भेजे गए सामान के लिए सेवा कर लगाने के संबंध में अधिकारियों की मांग को खारिज कर दिया है। यह मामला वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की पेशकश से पूर्व की पुरानी सेवा कर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के विवाद जम्मू-कश्मीर के मामले में भी मौजूदा जीएसटी में पैदा नहीं हो सकते। यह मामला उन पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाली कंपनी से संबंधित है जिन्हें अप्रैल 2011 से सितंबर 2014 के दौरान जम्मू-कश्मीर में माल ढुलाई एजेंसी द्वारा दी गई सेवाओं के लिए सेवा कर अधिकारियों द्वारा नोटिस मिला था। कंपनी ने तर्क दिया है कि चूंकि 1994 से लागू सेवा कर (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) इन सेवाओं पर लागू नहीं हो सकता। 
 
सामान्य तौर पर सेवा का विक्रेता सेवा प्राप्तकर्ता से इस कर को काटने के बाद सरकार के पास जमा करने के लिए जिम्मेदार होता है। रिवर्स चार्ज प्रणाली के तहत सेवा के खरीदार ने सेवा प्रदाता को भुगतान करने से पहले सेवा कर काटा और इसे सरकार के पास जमा किया। यह मामला नोएडा में सेवा कर आयुक्त के आदेश पर अधिकारियों के पक्ष में निपटाया गया। आदेश में कंपनी से लगभग 2 करोड़ रुपये का सेवा कर और समान रकम का जुर्माना चुकाने को कहा गया।
 
'बकाया कर वसूली के लिए बने कार्य योजना'
 
संसदीय समिति ने बकाया करों की वसूली के लिए सरकार से एक ठोस कार्य योजना बनाने को कहा है। बकाया कर की राशि बढ़कर 11.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।  वित्तीय मामलों की स्थायी समिति (2017-18) ने कहा है कि यह चिंताजनक स्थिति है कि राजस्व विभाग कर बकाया के दुष्चक्र में फंस गया है। 11.5 लाख करोड़ रुपये (प्रत्यक्ष करों में 9,30,741 करोड़ रुपये और अप्रत्यक्ष करों में 2,28,530 करोड़ रुपये) पिछले करों के तौर पर बकाया हैं। 
कीवर्ड GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,

  
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