'भारत का व्यापार घाटा 'दीर्घकालिक' नहीं'

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Mar 26, 2018 10:12 PM IST

भारत और चीन का व्यापारिक संबंध

भारत-चीन के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करने पर रहेगा जोर
चीन से भारत का आयात 2016-17 में 61.3 अरब डॉलर और निर्यात 10.2 अरब डॉलर से भी कम था
दोनों देशों की सरकारों ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देकर वर्ष 2019 तक द्विपक्षीय व्यापार संतुलन के लिए सितंबर 2014 में समझौता किया था

चीन सरकार ने इसे लेकर सहमति जताई है कि भारत के साथ उसके व्यापार में व्यापक असंतुलन दीर्घावधि व्यापार युद्ध के लिहाज से 'दीर्घकालिक' नहीं है। सोमवार को इस तरह का रुझान चीन के वाणिज्य मंत्री झोंग शैन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधि मंडल द्वारा व्यक्त किया गया। मंत्री ने कहा कि बैठक के बाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने चीन में भारतीय निवेश का स्वागत किया और व्यापार घाटे की समस्या को दूर करने का वादा किया। इंडो-चाइना ज्वाइंट ग्रुप ऑन इकोनोमिक रिलेशंस, ट्रेड, साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी के नेतृत्व में द्विपक्षीय वार्ता का इस्तेमाल भारत द्वारा इस विषय पर गंभीरता से विचार करने के लिए किया गया। इसका मकसद कृषिगत निर्यात की राह में समस्याओं में कमी लाना भी है।

एक विश्लेषक ने कहा, 'भूटान के विवादित डोकलाम को लेकर सैन्य गतिरोध के बाद व्यापार संबंधों पर वार्ता को लेकर पिछले साल से अस्पष्टïता के बादल छाए हुए थे। शैन की यात्रा से यह संकेत मिलता है कि चीन प्रमुख व्यापार भागीदार से संबंध चाहता है।' चीन से भारत का आयात 2016-17 में 61.3 अरब डॉलर और निर्यात 10.2 अरब डॉलर से भी कम था। सरकार अमेरिका (भारत के सबसे बड़े निर्यातक) और चीन के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित रही है, क्योंकि इससे वैश्विक मांग में गिरावट आ सकती है और व्यापार की लागत बढ़ सकती है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि व्यापार घाटे की समस्या आर्थिक संबंधों के विस्तार की राह में प्रमुख समस्या बना हुआ है। उन्होंने चीन से सरसों, सोयाबीन, बासमती और गैर-बासमती चावल, फल, सब्जियों और चीनी जैसे कृषिगत उत्पादों तक व्यापक बाजार पहुंच बनाने को कहा। दोनों देशों की सरकारों ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देकर वर्ष 2019 तक द्विपक्षीय व्यापार संतुलन के लिए सितंबर 2014 में समझौता किया था। 

अमेरिकी व्यापार युद्ध से बचने के लिए बाजार खोलेगा चीन
चीन के प्रधानमंत्री ली कछ्ïयांग ने कहा है कि चीन और अमेरिका को वार्ता को बरकरार रखना चाहिए और साथ ही उन्होंने अमेरिकी व्यवसाय के लिए आसान पहुंच पर जोर दिया। ली ने वैश्विक मुख्य कार्याधिकारियों की उपस्थिति वाले एक सम्मेलन में कहा कि चीन विदेशी और घरेलू कंपनियों को समान नजरिये से देखेगा और विदेशी कंपनियों को प्रौद्योगिकी स्थानांतरित करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।  वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अज्ञात सूत्रों से सोमवार को दी खबर में कहा है कि वहीं अमेरिका ने पिछले सप्ताह भेजे एक पत्र में चीन से अमेरिकी वाहनों पर शुल्क घटाने, अमेरिका में बने सेमीकंडक्टर ज्यादा खरीदने और अमेरिकी कंपनियों को चीन के वित्तीय क्षेत्र तक व्यापक पहुंच बनाने का अवसर देने को कहा।
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